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ईडी ने अनिल अंबानी के रिलायंस समूह से जुड़ी 35 जगहों पर की छापेमारी, 50 कंपनियों पर भी शक!

ईडी की जांच में यस बैंक के पूर्व चेयरमैन राणा कपूर भी शामिल हैं. 2017 से 2019 के बीच यस बैंक से 3,000 करोड़ रुपये के ऋण अवैध रूप से डायवर्ट किए गए. ईडी को पता चला कि ऋण स्वीकृति से पहले बैंक के प्रमोटरों के खातों में पैसे जमा हुए.

Calendar Last Updated : 24 July 2025, 12:52 PM IST
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ED Raids Reliance Anil Ambani Group: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गुरुवार को अनिल अंबानी की रिलायंस अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (आरएएजीए) की कंपनियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की. मुंबई और दिल्ली में 35 से अधिक ठिकानों पर छापेमारी हुई. यह कार्रवाई 3,000 करोड़ रुपये के यस बैंक ऋण धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई. ईडी ने 50 कंपनियों और 25 से अधिक लोगों को जांच के दायरे में लिया.

ईडी की जांच में यस बैंक के पूर्व चेयरमैन राणा कपूर भी शामिल हैं. 2017 से 2019 के बीच यस बैंक से 3,000 करोड़ रुपये के ऋण अवैध रूप से डायवर्ट किए गए. ईडी को पता चला कि ऋण स्वीकृति से पहले बैंक के प्रमोटरों के खातों में पैसे जमा हुए. यह रिश्वत और ऋण के गठजोड़ की ओर इशारा करता है. जांच में रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (आरएचएफएल) और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (आरसीएफएल) को दिए गए ऋणों पर ध्यान है.

ऋण प्रक्रिया में गड़बड़ी  

ईडी ने यस बैंक की ऋण स्वीकृति प्रक्रिया में कई खामियां पकड़ीं. ऋण अनुमोदन ज्ञापन (सीएएम) को पिछली तारीख में तैयार किया गया. बिना उचित जांच या विश्लेषण के निवेश प्रस्ताव रखे गए. यह बैंक की नीतियों का उल्लंघन था. ऋणों को समूह की अन्य कंपनियों और शेल कंपनियों में डायवर्ट किया गया. कमजोर वित्तीय स्थिति वाली कंपनियों को भी ऋण दिए गए. जांच में सामने आया कि कई उधारकर्ता कंपनियों के पते और निदेशक एक ही थे. कुछ ऋण आवेदन के दिन ही वितरित कर दिए गए. कई बार स्वीकृति से पहले ही पैसे दे दिए गए. वित्तीय विवरणों में गलत जानकारी दी गई. यह सब एक सुनियोजित योजना का हिस्सा था. ईडी का कहना है कि इससे बैंकों, शेयरधारकों और निवेशकों को धोखा दिया गया.

रिलायंस होम फाइनेंस पर नजर  

सेबी ने रिलायंस होम फाइनेंस (आरएचएफएल) में अनियमितताएं पकड़ीं. वित्त वर्ष 2017-18 में इसका कॉर्पोरेट ऋण 3,742.60 करोड़ रुपये था, जो 2018-19 में बढ़कर 8,670.80 करोड़ रुपये हो गया. इस तेज वृद्धि ने संदेह पैदा किया. सेबी, राष्ट्रीय आवास बैंक, एनएफआरए और बैंक ऑफ बड़ौदा ने भी ईडी को महत्वपूर्ण जानकारी दी. ईडी की कार्रवाई सीबीआई की दो एफआईआर पर आधारित है. ये एफआईआर 19 सितंबर, 2022 को दर्ज की गई थीं. इनमें राणा कपूर और रिलायंस समूह की कंपनियों पर गंभीर आरोप लगे. ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 17 के तहत छापेमारी की. रिलायंस एडीएजी समूह से टिप्पणी के लिए संपर्क किया गया. कंपनी ने कहा कि वह जल्द बयान जारी करेगी. इस बीच, रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर और रिलायंस पावर के शेयर 4% तक गिर गए.

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