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नई दिल्ली: भारत और न्यूजीलैंड के बीच दोस्ती का एक नया अध्याय शुरू होने वाला है. हाल ही में, दोनों देशों ने एक महत्वपूर्ण फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए थे. अब, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 जुलाई को न्यूजीलैंड के आधिकारिक दौरे पर जाएंगे. न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने इस महत्वपूर्ण यात्रा की पुष्टि की है. यह पहली बार होगा जब कोई भारतीय प्रधानमंत्री न्यूजीलैंड का दौरा करेंगे, और यह दोनों देशों के बीच दोस्ती का एक बड़ा कदम होगा.
भारत-न्यूजीलैंड दोस्ती में नया दौर
प्रधानमंत्री मोदी 10 जुलाई को ऑकलैंड पहुंचेंगे और अगले दिन वापस लौटेंगे. न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री लक्सन ने इस दौरे को लेकर बहुत उत्साह जताया है. उन्होंने कहा है कि यह दौरा दोनों देशों के बीच दोस्ती का एक महत्वपूर्ण कदम होगा, जो दोनों देशों की तरक्की को बढ़ावा देगा.
FTA से व्यापार में बढ़ोतरी
भारत और न्यूजीलैंड ने इस साल 27 अप्रैल को एक महत्वपूर्ण फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए थे. न्यूजीलैंड ने अपने बाजार में सभी भारतीय उत्पादों को 100% ड्यूटी-फ्री एक्सेस देने का फैसला किया है. इससे भारत के कपड़ा, लेदर, फुटवियर, इंजीनियरिंग सामान, जेम्स और ज्वैलरी जैसे उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे.
भारत का रुख
भारत ने न्यूजीलैंड के 70% उत्पादों पर से शुल्क कम करने या उन्हें चरणबद्ध तरीके से खत्म करने पर सहमति दी है. भारत ने अपने डेयरी क्षेत्र और कुछ संवेदनशील कृषि उत्पादों को इस समझौते से बाहर रखा है ताकि देश के किसानों और घरेलू डेयरी उद्योग के हितों पर कोई आंच न आए.
छात्रों और प्रोफेशनल्स के लिए नए अवसर
इस समझौते की एक और बड़ी खूबी यह है कि न्यूजीलैंड अगले 15 वर्षों में भारत में 20 अरब डॉलर का निवेश बढ़ाएगा. इसके साथ ही, भारतीय प्रोफेशनल्स जैसे आईटी एक्सपर्ट्स, इंजीनियरों, स्वास्थ्यकर्मियों, योग प्रशिक्षकों, आयुष विशेषज्ञों, शेफ और म्यूजिक टीचर्स के लिए विशेष वीजा की व्यवस्था की गई है. भारतीय छात्रों के लिए भी यह समझौता बेहतरीन अवसर लाया है, जिसमें छात्र संख्या की तय सीमा हटा दी गई है और पढ़ाई के दौरान काम करने और कोर्स पूरा होने के बाद 3 से 4 साल का पोस्ट-स्टडी वर्क वीजा दिए जाने का प्रावधान किया गया है.
वैश्विक कूटनीति में भारत का बढ़ता प्रभाव
न्यूजीलैंड के इस संभावित दौरे से पहले पीएम मोदी ने मई के महीने में पांच देशों, यूएई, नीदरलैंड, इटली, स्वीडन और नॉर्वे की व्यापक यात्रा की थी. उस दौरान भारत की वार्ताओं का मुख्य एजेंडा ग्रीन ट्रांजिशन, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, रणनीतिक निवेश, सुरक्षित सप्लाई चेन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में वैश्विक सहयोग बढ़ाना था. अब न्यूजीलैंड की यह यात्रा भारत की 'इंडो-पैसिफिक' रणनीति और वैश्विक व्यापार में देश की मजबूत होती धाक को और अधिक पुख्ता करेगी.