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लखनऊ: उत्तर प्रदेश के आलू किसानों को बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव और बढ़ती खेती की लागत से राहत देने के लिए योगी सरकार ने तीन अहम योजनाएं शुरू की हैं. इन योजनाओं के जरिए किसानों को आलू की उत्पादन लागत, भंडारण और गुणवत्तापूर्ण बीज खरीदने में आर्थिक मदद मिलेगी. सरकार ने इसके लिए 1000 करोड़ रुपये के भामाशाह भाव स्थिरता कोष की व्यवस्था की है.
आलू के बाजार भाव में गिरावट आने पर किसानों को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए भाव स्थिरता योजना लागू की गई है. कृषि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता वाली समिति आलू की उत्पादन लागत तय करेगी.
इसके बाद यदि बाजार में आलू की कीमत निर्धारित लागत से कम रहती है तो किसानों को सब्सिडी दी जाएगी. यह सहायता उत्पादन लागत के 25 प्रतिशत या उत्पादन लागत और बिक्री मूल्य के बीच के अंतर में से जो राशि कम होगी, उसके आधार पर तय होगी.
फसल को कम दाम पर बेचने की मजबूरी से बचाने के लिए सरकार ने निजी कोल्ड स्टोरेज में आलू रखने वाले किसानों को भी राहत देने का फैसला किया है. योजना के तहत किसानों को भंडारण शुल्क पर अधिकतम 100 रुपये प्रति क्विंटल तक की सहायता मिलेगी. एक किसान को मिलने वाली कुल सब्सिडी की सीमा 20 हजार रुपये निर्धारित की गई है. इससे किसान अपनी उपज को कुछ समय तक सुरक्षित रखकर बेहतर कीमत का इंतजार कर सकेंगे.
तीसरी योजना के तहत किसानों को बेहतर गुणवत्ता वाले आलू बीज उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है. विभाग के आधार बीज की बिक्री दर पर किसानों को अधिकतम 1000 रुपये प्रति क्विंटल तक की छूट मिलेगी. सरकार का मानना है कि प्रमाणित और गुणवत्तापूर्ण बीज के इस्तेमाल से आलू की पैदावार और गुणवत्ता दोनों में सुधार हो सकता है.
इन तीनों योजनाओं का उद्देश्य किसानों को आलू की खेती के अलग-अलग चरणों में आर्थिक सुरक्षा देना है. सरकार के मुताबिक, बीज खरीदने से लेकर फसल के भंडारण और बाजार में बिक्री तक मिलने वाली मदद से किसानों पर कीमतों में अचानक गिरावट का असर कम होगा.