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झारखंड में बेकाबू हुआ छात्र आंदोलन, बातचीत विफल होने के बाद सड़कों पर उतरे हजारों अभ्यर्थी

झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षा विवाद को लेकर छात्रों और सरकार के बीच पांच घंटे चली बातचीत बेनतीजा रही. CBI जांच और JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने की मांग पर सहमति नहीं बनी, जिसके बाद छात्रों ने विधानसभा मार्च शुरू कर दिया.

Calendar Last Updated : 10 August 2026, 02:26 PM IST
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रांची: झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आंदोलन अब और तेज हो गया है. रविवार को सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच करीब पांच घंटे तक तीन दौर की बातचीत हुई, लेकिन कोई सहमति नहीं बन सकी. इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने सोमवार, 10 अगस्त को तय विधानसभा घेराव के कार्यक्रम को आगे बढ़ाने का फैसला किया.

विधानसभा मार्च को लेकर छात्र संगठनों ने प्रदर्शनकारियों से किसी भी तरह की अफवाह या बहकावे में नहीं आने की अपील की है. छात्रों को सुबह 10 बजे से पहले पुरानी विधानसभा के पास पहुंचने के लिए कहा गया था. इसके बाद छात्र समूह के रूप में नई विधानसभा की ओर शांतिपूर्ण पैदल मार्च के लिए रवाना हुए. मार्च के दौरान पुलिस ने बैरिकेड लगाकर प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश की. प्रशासन ने पहले से ही विधानसभा घेराव को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी थी.

सरकार का दावा- 98 फीसदी मांगें मानीं

रविवार को हुई बैठक में सरकार की ओर से मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, दीपिका पांडेय सिंह, संजय प्रसाद यादव और चमरा लिंडा शामिल हुए. सरकार का कहना है कि बातचीत के दौरान छात्रों की करीब 98 प्रतिशत मांगों को स्वीकार कर लिया गया है. इनमें 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा और ACF परीक्षा रद्द करने, TDPL एजेंसी की ओर से आयोजित परीक्षाओं की जांच कराने और परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए विशेषज्ञों की समिति गठित करने जैसे फैसले शामिल हैं.

JSSC-CGL और CBI जांच पर नहीं बनी सहमति

हालांकि, छात्रों की सबसे अहम मांगों में JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करना और पूरे मामले की CBI जांच कराना शामिल है. छात्र प्रतिनिधि इन मांगों से पीछे हटने को तैयार नहीं हुए. JMM मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि JSSC-CGL परीक्षा हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हुई थी. ऐसे में राज्य सरकार के पास इसे रद्द करने या सीधे CBI जांच का आदेश देने का अधिकार नहीं है.

CBI की जगह ED जांच का प्रस्ताव

CBI जांच की मांग के बदले सरकार ने वित्तीय लेन-देन की जांच ED से कराने का विकल्प दिया. इसके अलावा रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक जांच कमेटी बनाने और 90 दिनों के भीतर रिपोर्ट तैयार कराने के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट गठित करने का प्रस्ताव भी रखा गया. छात्र नेताओं ने इन प्रस्तावों को स्वीकार नहीं किया. उनका कहना है कि TDPL की सभी परीक्षाओं और JSSC-CGL को रद्द करने के साथ पूरे मामले की CBI जांच का लिखित आदेश मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा.

2 हजार से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात

विधानसभा घेराव को देखते हुए रांची प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए हैं. नई विधानसभा के 750 मीटर के दायरे में, झारखंड हाई कोर्ट को छोड़कर, BNS की धारा 163 लागू की गई है. धरनास्थल से विधानसभा तक करीब 13 किलोमीटर के रास्ते में पांच जगह बैरिकेड लगाए गए हैं. 2 हजार से ज्यादा पुलिसकर्मियों के साथ IRB और QRT की टीमें तैनात हैं. विधानसभा के मुख्य गेट के आसपास कंटीले तारों से घेरा बनाया गया है. विधानसभा से एक किलोमीटर के दायरे में धरना, प्रदर्शन और भीड़ जुटाने पर रोक है. वहीं, धरनास्थल से विधानसभा तक के मार्ग में आने वाले स्कूलों को भी बंद रखने का फैसला लिया गया है.

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