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'तुम्हारे बिना यह संभव नहीं था', अतंरिक्ष में जाने से पहले शुभांशु शुक्ला ने पत्नी को लिखा भावुक नोट

लॉन्च से पहले शुक्ला ने अपनी पत्नी कामना के लिए इंस्टाग्राम पर भावुक संदेश लिखा. उन्होंने कहा कि मैं सभी का समर्थन और आशीर्वाद के लिए धन्यवाद देता हूं. कामना, तुम्हारे बिना यह संभव नहीं था. उन्होंने कांच की दीवार से विदाई की तस्वीर भी साझा की.

Calendar Last Updated : 25 June 2025, 12:51 PM IST
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Shubhanshu Shukla: भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला के साथ सभी भारतीयों के लिए आज खास दिन है. वह एक्सिओम-4 मिशन के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) के लिए रवाना हुए. यह मिशन भारत के लिए गर्व का क्षण है. शुक्ला चार दशक बाद पहले भारतीय के रूप में अंतरिक्ष यात्रा पर जा रहे हैं. 

एक्सिओम-4 मिशन का लॉन्च फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से हुआ. स्पेसएक्स का फाल्कन-9 रॉकेट ड्रैगन यान को लेकर दोपहर 12:01 बजे (IST) उड़ा. यान गुरुवार को शाम 4:00 बजे या सुबह 7:00 बजे (IST) आईएसएस से जुड़ेगा. पोलैंड के स्लावोज़ उज़्नान्स्की-विस्नीव्स्की और हंगरी के टिबोर कापू मिशन विशेषज्ञ हैं. यह भारत, पोलैंड और हंगरी का पहला संयुक्त आईएसएस मिशन है.

शुक्ला का भावनात्मक संदेश

लॉन्च से पहले शुक्ला ने अपनी पत्नी कामना के लिए इंस्टाग्राम पर भावुक संदेश लिखा. उन्होंने कहा कि मैं सभी का समर्थन और आशीर्वाद के लिए धन्यवाद देता हूं. कामना, तुम्हारे बिना यह संभव नहीं था. उन्होंने कांच की दीवार से विदाई की तस्वीर भी साझा की. शुक्ला ने कहा कि यह मिशन उनके लिए बहुत खास है. वह इसे देश के लिए समर्पित करते हैं. लखनऊ में जन्मे शुक्ला और कामना की मुलाकात तीसरी कक्षा में हुई थी. कामना ने बताया कि हम बचपन से दोस्त हैं. शुभांशु, जिसे मैं गुंजन कहती हूं, शर्मीला था. अब वह लाखों को प्रेरित कर रहा है. दंपती का एक छह साल का बेटा भी है. 

मिशन का वैज्ञानिक महत्व

शुक्ला 14 दिन तक आईएसएस पर रहेंगे. वह सात भारतीय वैज्ञानिक प्रयोग करेंगे. इनमें बीज अंकुरण, टार्डिग्रेड्स की जीवटता और मांसपेशियों के उत्थान का अध्ययन शामिल है. ये प्रयोग गगनयान मिशन के लिए महत्वपूर्ण हैं. शुक्ला अंतरिक्ष से पीएम मोदी और स्कूली बच्चों से बात करेंगे. वह भारतीय खाने जैसे आमरस भी ले गए हैं. शुभांशु का जन्म 1985 में लखनऊ में हुआ. 2006 में वह वायुसेना में शामिल हुए. उन्होंने सुखोई-30 और मिग-21 जैसे विमानों में दो हजार घंटे की उड़ान भरी. उन्हें गगनयान के लिए भी चुना गया है. गगनयान मिशन 2027 में होना है. भारत के लिए एक्सिओम-4 मिशन काफी महत्वपूर्ण है. क्योंकि इस दौरान अंतरिक्ष रोडमैप बनाया जा रहा है. शुक्ला का अनुभव आने वाले समय में इसरो को काफी काम आने वाला है. 

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