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पहलगाम हमले के पीछे आतंकी साजिश का खुलासा, पुंछ से कश्मीर तक सक्रिय समूह

सुरक्षा एजेंसियों ने इस हमले को पुंछ के देहरा की गली (डीकेजी) मार्ग से घुसपैठ करने वाले आतंकी समूह से जोड़ा है. यह समूह 2022 के अंत या 2023 की शुरुआत से सक्रिय है. जांच से पता चला कि यह समूह पुंछ से कश्मीर तक कई हमलों में शामिल रहा.

Calendar Last Updated : 23 June 2025, 12:05 PM IST
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Terror Trail: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की जांच की जा रही है. सुरक्षा एजेंसियों ने इस हमले को पुंछ के देहरा की गली (डीकेजी) मार्ग से घुसपैठ करने वाले आतंकी समूह से जोड़ा है. यह समूह 2022 के अंत या 2023 की शुरुआत से सक्रिय है. जांच से पता चला कि यह समूह पुंछ से कश्मीर तक कई हमलों में शामिल रहा.

इस आतंकी समूह ने पहली बार 21 दिसंबर 2023 को पुंछ के सुरनकोट में बुफलियाज इलाके के देहरा की गली में हमला किया. इस घात में चार भारतीय जवान शहीद हुए. मई 2024 में समूह ने फिर सुरनकोट के सनाई में भारतीय वायुसेना के काफिले पर हमला किया. खुफिया सूत्रों के अनुसार, यह समूह घने जंगलों और पहाड़ी इलाकों में कई महीनों तक सक्रिय रहा.

जांच एजेंसी ने किया खुलासा 

पुंछ में कई महीनों तक छिपने के बाद, समूह ने अगस्त-सितंबर 2024 में डीकेजी-बुफलियाज मार्ग से कश्मीर में प्रवेश किया. बडगाम पहुंचकर यह दो छोटे गुटों में बंट गया. एक गुट गुलमर्ग और दूसरा सोनमर्ग की ओर बढ़ा और 20 अक्टूबर को स्थानिय मजदूरों पर हमला किया गया. 26 अक्टूबर को गुलमर्ग में सेना के ट्रकों पर फायरिंग की गई. सुरक्षा बलों ने बड़े आतंकवाद विरोधी अभियान में सोनमर्ग हमले के जिम्मेदार स्थानीय आतंकी जुनैद को श्रीनगर के हरवान में मार गिराया.

इस ऑपरेशन में एक पाकिस्तानी आतंकी बच निकला. जुनैद के फोन से मिली तस्वीरों ने पुंछ के हमलों में समूह की संलिप्तता की पुष्टि की. यह खुलासा समूह के हिंसक नेटवर्क को उजागर करता है. जांच से पता चला कि पहलगाम हमले से पहले दोनों आतंकी गुट फिर से एकजुट हुए. इस हमले में संसाधनों और योजना का खतरनाक समन्वय देखा गया. हमले के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने हपटनार, त्राल और डीएच पोरा से संचार संकेत पकड़े. यह समूह के व्यापक नेटवर्क और संभावित ठिकानों की ओर इशारा करता है.

पहाड़ी रास्तों का इस्तेमाल

आतंकी समूह सड़कों से बचकर पहाड़ी मार्गों का इस्तेमाल करता है. आपस में जुड़ी पर्वत श्रृंखलाएं छिपने और फिर से संगठित होने के लिए आदर्श हैं. इससे सुरक्षा बलों को आतंकियों का पीछा करने में मुश्किल होती है. यह रणनीति समूह की गतिशीलता को बढ़ाती है. हमलों का पैटर्न स्पष्ट होने के बाद, सुरक्षा एजेंसियां कश्मीर घाटी में आतंकवाद विरोधी अभियान तेज कर रही हैं. लक्ष्य इस मोबाइल और खतरनाक समूह के बचे हुए सदस्यों को पकड़ना है. ड्रोन और हेलिकॉप्टर की मदद से सघन तलाशी अभियान चल रहे हैं.

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