Courtesy: pinterest
नई दिल्ली: नेपाल में लगातार बिगड़ते हालात के बीच बिहार के लिए भी चिंता बढ़ गई है. तिब्बत-नेपाल सीमा के पास एक और झील के फटने की सूचना के बाद बिहार में नदियों और तटबंधों की निगरानी बढ़ा दी गई है. जल संसाधन विभाग ने वाल्मीकिनगर से लेकर कोसी क्षेत्र तक अधिकारियों और इंजीनियरों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं.
नेपाल में भारी बारिश और बाढ़ के कारण नदियों में पानी बढ़ने की आशंका को देखते हुए वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बराज और वीरपुर स्थित कोसी बराज पर निगरानी तेज कर दी गई है. अधिकारियों को जलस्तर और पानी के बहाव में होने वाले हर बदलाव पर नजर रखने को कहा गया है.
गंडक नदी के साथ आने वाले मलबे पर भी विभाग नजर बनाए हुए है. सभी प्रमुख तटबंधों, स्पर और स्टड की लगातार जांच की जा रही है, ताकि किसी भी तरह की परेशानी सामने आने पर तुरंत कार्रवाई की जा सके.
नेपाल में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए कोसी बराज पर भी सतर्कता बढ़ाई गई है. बराज के कुल 56 फाटकों में से 17 फाटक खोले गए हैं, जिससे अतिरिक्त पानी को नियंत्रित तरीके से आगे निकाला जा सके. विभाग के मुताबिक फिलहाल पूर्वी और पश्चिमी तटबंध सुरक्षित हैं.
अधिकारियों के अनुसार नेपाल की भोटेकोशी नदी से अतिरिक्त पानी आने की संभावना है. हालांकि, मौजूदा आकलन के मुताबिक इससे कोसी के प्रवाह पर बड़ा असर पड़ने की उम्मीद नहीं है.
जल संसाधन विभाग के मुख्यालय में गंडक नदी के डिस्चार्ज की जानकारी नियमित अंतराल पर ली जा रही है. इंजीनियरों की टीमें दिन-रात प्रभावित और संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी कर रही हैं. जिलाधिकारियों और स्थानीय प्रशासन को भी अलर्ट रहने को कहा गया है.
नेपाल से निकलने वाली कई पहाड़ी नदियां बिहार में प्रवेश करती हैं. इनमें गंडक और सिकरहना जैसी नदियां प्रमुख हैं. नेपाल में झील टूटने या अचानक बाढ़ आने की स्थिति में इन नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है.
इसी खतरे को देखते हुए पश्चिम चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर समेत उत्तर बिहार के संवेदनशील इलाकों में प्रशासन को विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं. फिलहाल विभाग की प्राथमिकता तटबंधों को सुरक्षित रखना और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत राहत-बचाव शुरू करना है.