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चेन्नई: मंगलवार सुबह तमिलनाडु की राजनीति में उस समय हलचल मच गई, जब पुलिस ने डीएमके नेता और विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन को उनके आवास से हिरासत में ले लिया. यह कार्रवाई अभिनेता तृषा को लेकर दिए गए कथित आपत्तिजनक बयान के मामले में की गई. उदयनिधि स्टालिन की गिरफ्तारी के बाद डीएमके तथा टीवीके आमने-सामने आ गए हैं और राज्य की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं.
विवाद की शुरुआत सोमवार को तंजावुर में आयोजित एक रैली से हुई. कावेरी जल विवाद को लेकर आयोजित इस कार्यक्रम में उदयनिधि स्टालिन मुख्यमंत्री जोसेफ विजय पर निशाना साध रहे थे. भाषण के दौरान भीड़ से "तृषा-तृषा" के नारे सुनाई दिए. इसके बाद उदयनिधि ने कथित तौर पर दोहरे अर्थ वाली टिप्पणी की, जिसे लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया. इस बयान की विभिन्न राजनीतिक दलों और संगठनों ने कड़ी आलोचना की.
#WATCH | DMK leader and LoP Udhayanidhi Stalin detained by Police from his Chennai residence, following an FIR against him over his alleged defamatory remarks against CM Vijay. Slogans directed at actor Trisha were raised at his rally yesterday. pic.twitter.com/wTM6rABo85
— ANI (@ANI) August 4, 2026
मंगलवार सुबह पुलिस टीम उदयनिधि स्टालिन के घर पहुंची और उन्हें हिरासत में लेकर चली गई. इस दौरान वह मुस्कुराते हुए दिखाई दिए. मीडिया से संक्षिप्त बातचीत में उन्होंने कहा कि यह गिरफ्तारी उनके लिए "एक मजाक" है और वह इस पूरे मामले का कानूनी तरीके से सामना करेंगे. पुलिस की इस कार्रवाई के बाद पूरे राज्य में राजनीतिक चर्चा तेज हो गई.
डीएमके ने इस कार्रवाई को पूरी तरह राजनीतिक प्रतिशोध बताया. पार्टी नेता टीकेएस एलंगोवन ने कहा कि उदयनिधि ने अपने भाषण में किसी महिला का नाम नहीं लिया था और उनका निशाना केवल मुख्यमंत्री विजय की नीतियां थीं. उन्होंने दावा किया कि भाषण में ऐसा कुछ भी नहीं था जिसे आपत्तिजनक कहा जाए. डीएमके का आरोप है कि विपक्ष की आवाज दबाने के लिए इस तरह की कार्रवाई की जा रही है.
वहीं, दूसरी ओर, तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) ने पुलिस की कार्रवाई का समर्थन किया. पार्टी नेता अमेरिकै नारायणन ने कहा कि उदयनिधि को किसी राजनीतिक टिप्पणी के कारण नहीं, बल्कि एक महिला सार्वजनिक हस्ती के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी करने के कारण हिरासत में लिया गया है. उन्होंने कहा कि महिलाओं के सम्मान से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की ढील नहीं दी जानी चाहिए.