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'हम चर्चा कर रहे हैं, पहले केवल मुहर लगती थी', वक्फ बिल पर बोले अमित शाह

अमित शाह ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के जमाने में समिति होती थी जो थप्पा लगाती थी. हमारी समिति चर्चा करती है, चर्चा के आधार पर विचार-विमर्श करती है और बदलाव करती है. अगर बदलाव स्वीकार नहीं किए जाने हैं, तो समिति का क्या मतलब है?

Calendar Last Updated : 02 April 2025, 01:04 PM IST
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Waqf Amendment Bill: लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक 2024 पर बहस जारी है. जिसमें पक्ष और विपक्ष के बीच जमकर बहस हो रही है. केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने विधेयक पेश किया. वहीं विपक्षी पार्टियों द्वारा लगातार हंगामा किया जा रहा है. उन्होंने इस विधेयक को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं. हालांकि इन आरोपों को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सिरे से नकार दिया है. 

अमित शाह ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के जमाने में समिति होती थी जो थप्पा लगाती थी. हमारी समिति चर्चा करती है, चर्चा के आधार पर विचार-विमर्श करती है और बदलाव करती है. अगर बदलाव स्वीकार नहीं किए जाने हैं, तो समिति का क्या मतलब है?

कानून को जबरन थोपने की कोशिश

कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने इस विधेयक का विरोध करते हुए इसे जबरन थोपने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि इस तरह का बिल (वक्फ संशोधन विधेयक) जिसे आप सदन में ला रहे हैं, कम से कम सदस्यों के पास संशोधन करने का अधिकार होना चाहिए.आप कानून को जबरन थोप रहे हैं. यह इस तरह का कानून है. आपको संशोधन के लिए समय देना चाहिए. संशोधन के लिए कई प्रावधान हैं. बिल्कुल भी समय नहीं है. वहीं बिल को पेश करते हुए किरेन रिजिजू ने इस विधेयक को वक्फ संपत्तियों के विनियमन और निगरानी में सुधार करने वाला कानून बताया है. उन्होंने कहा कि इस विधेयक का उद्देश्य केवल वक्फ अधिनियम के कुछ प्रावधानों में बदलाव करना है. 

धार्मिक स्थलों पर कोई असर नहीं 

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस विधेयक से किसी भी मस्जिद प्रबंधन या किसी भी धार्मिक स्थलों पर कोई भी असर नहीं पड़ने वाला है. उन्होंने पहले की यूपीए सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि यूपीए सरकार द्वारा वक्फ कानून में किए गए बदलावों ने इसे अन्य कानूनों पर हावी कर दिया. इसलिए नए संशोधनों की आवश्यकता थी. हालांकि सदन में अभी भी दोनों पार्टियां मजबूती से अपनी बातें रखने में जुटी है. 

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