नई दिल्ली: मंगलवार की सुबह अफगानिस्तान के लिए खौफनाक रही. क्योंकि सोमवार की शाम करीब 9 बजे पाकिस्तानी ने अफगानिस्तान की राजधानी काबुल के एक अस्पताल पर कथित तौर पर हवाई हमला किया. रिपोर्ट्स के अनुसार इस हमले में लगभग 400 की लोगों की जान चली गई और 250 लोगों के घायल होने की खबर सामने आ रही है.
अब हमले के बाद अफगानिस्तान के कई क्रिकेटर ने ट्वीट कर इस घटना की निंदा की है. इस कड़ी में अफगानिस्तान के स्टार खिलाड़ी नवीन उल हक, पूर्व कप्तान राशिद खान और ऑलराउंडर मोहम्मद नबी ने अपने आधिकारिक अकाउंट से ट्वीट कर इसकी आलोचना की है. इतना ही नहीं इसे युद्ध अपराध बताया है.
आईपीएल टीम लखनऊ सुपर जायंट्स के लिए खेल चुके नवीन उल हक ने अपने आधिकारिक फेसबुक अकाउंट पर लिखा कि, 'इजराइल और पाकिस्तानी शासनकाल के बीच कोई अंतर ढूंढना मुश्किल है.' दोनों देशों के बीच कोई अंतर नहीं है. बता दें नवीन उल हक के इस अकाउंट पर करीब 4 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हैं.'
Naveen Ul Haq's latest post.
— Mahi. (@im_mahi0) March 17, 2026
Pray for Afghanistan🇦🇫 pic.twitter.com/iOQAWbbt2C
अफगानिस्तान क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान राशिद खान ने इस घटना पर गहरा शोक जताते हुए लिखा कि नागरिकों, शैक्षणिक संस्थानों या चिकित्सा ढांचे को निशाना बनाना युद्ध अपराध है, और इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि यह जानबूझकर किया गया या नहीं. स्टार स्पिनर ने आगे लिखा कि ये ताजा घटना केवल विभाजन और नफरत को बढ़ावा देगी.
I am deeply saddened by the latest reports of civilian casualties as a result of Pakistani airstrikes in Kabul. Targeting civilian homes, educational facilities or medical infrastructure, either intentional or by mistake, is a war crime. The sheer disregard for human lives,… pic.twitter.com/DbFRRh2qAJ
— Rashid Khan (@rashidkhan_19) March 16, 2026
राशिद के बाद टीम के अनुभवी ऑलराउंडर मोहम्मद नबी ने अपने ट्वीटर अकाउंट पर लिखा कि अस्पताल में सारी उम्मीदें खत्म हो गई हैं. आज रात काबुल के एक अस्पताल में उम्मीद की किरण मिट गई. इलाज के लिए आए युवाओं को पाकिस्तानी सैन्य शासन द्वारा मार दिया गया. रमजान के पाक महीने में ऐसा करना गुनाह है.
Tonight in Kabul, hope was extinguished at a hospital. Young men seeking treatment were murdered in a bombing by the Pakistani military regime. Mothers waited at the gates, calling their sons’ names. On the 28th night of Ramadan, their lives were cut short. pic.twitter.com/p12617D4de
— Mohammad Nabi (@MohammadNabi007) March 16, 2026