बद्रीनाथ-केदारनाथ में अब सिर्फ हिंदुओं की एंट्री! बीकेटीसी का बड़ा फैसला, गैर-हिंदुओं पर पूर्ण प्रतिबंध

उत्तराखंड के पवित्र चारधाम से जुड़ी एक बड़ी और अहम खबर सामने आई है, जिसने धार्मिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है. बद्रीनाथ और केदारनाथ मंदिरों में अब केवल हिंदुओं को ही प्रवेश की अनुमति होगी. गैर हिंदू को इन मंदिरों में प्रवेश की अनुमति नहीं है.

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नई दिल्ली: उत्तराखंड के पवित्र चारधाम से जुड़ी एक बड़ी और अहम खबर सामने आई है, जिसने धार्मिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है. उत्तराखंड के सदियों पुराने बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर मंदिरों में ने चारधाम और उससे जुड़े प्रमुख तीर्थ स्थलों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है. रिपोर्ट है कि बद्रीनाथ और केदारनाथ मंदिरों में अब केवल हिंदुओं को ही प्रवेश की अनुमति होगी. गैर हिंदू को इन मंदिरों में प्रवेश की अनुमति नहीं है. मंदिर समिति ने घोषणा की है कि चार धाम तीर्थयात्रा मार्ग का हिस्सा रहे इन दोनों मंदिरों में गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित रहेगा. आगामी मंदिर समिति बोर्ड की बैठक में इस निर्णय से संबंधित एक प्रस्ताव पारित किया जाएगा.

मंदिर समिति का आधिकारिक बयान

इस पूरे घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने साफ तौर पर कहा कि समिति के अधीन आने वाले सभी मंदिरों में गैर-हिंदुओं का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा. उन्होंने बताया कि यह नियम केवल बदरीनाथ और केदारनाथ तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि समिति द्वारा संचालित अन्य मंदिरों में भी समान रूप से लागू किया जाएगा.

बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की तारीख तय

इसी बीच श्रद्धालुओं के लिए एक राहत भरी खबर भी सामने आई है. उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित बदरीनाथ मंदिर के कपाट छह महीने के शीतकालीन अवकाश के बाद 23 अप्रैल को फिर से खोल दिए जाएंगे. मंदिर अधिकारियों ने शुक्रवार को इसकी आधिकारिक घोषणा की. हर साल भारी बर्फबारी के कारण सर्दियों में मंदिर को बंद कर दिया जाता है, जिसके बाद गर्मियों की शुरुआत में श्रद्धालुओं के लिए कपाट खोले जाते हैं.

बसंत पंचमी पर तय हुई शुभ तिथि

बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया कि बदरीनाथ मंदिर के कपाट खोलने की तिथि बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर तय की गई. इस दौरान टिहरी जिले के नरेंद्र नगर स्थित टिहरी रॉयल पैलेस में पारंपरिक पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए, जिसके बाद मंदिर खोलने का शुभ मुहूर्त निर्धारित किया गया.

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