RJD में तेजस्वी युग का आगाज, लालू यादव ने सौंपी बेटे को पार्टी की कमान

राष्ट्रीय जनता दल RJD की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में पार्टी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने औपचारिक रूप से अपने छोटे बेटे और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया.

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पटना: बिहार की राजनीति में रविवार को एक नए अध्याय की शुरुआत हुई. राष्ट्रीय जनता दल RJD की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में पार्टी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने औपचारिक रूप से अपने छोटे बेटे और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया. राजद के इतिहास में यह पहली बार है जब कार्यकारी अध्यक्ष के पद का सृजन किया गया है, जो पार्टी के भीतर पूर्ण सत्ता हस्तांतरण और पीढ़ीगत बदलाव का स्पष्ट संकेत है.

हार के बाद संकटमोचक की भूमिका

यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब राजद अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रही है. हाल ही में संपन्न हुए बिहार विधानसभा चुनावों में महागठबंधन को करारी शिकस्त मिली है. कांग्रेस के साथ गठबंधन में 143 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली RJD मात्र 25 सीटों पर सिमट गई. सीटों के नुकसान के बावजूद, राजद वोट शेयर के मामले में राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है और तेजस्वी ने अपनी राघोपुर सीट बरकरार रखी है. अब 36 वर्षीय तेजस्वी के कंधों पर पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को फिर से खड़ा करने की जिम्मेदारी है.

घर की कलह और भाई का विद्रोह

तेजस्वी की इस पदोन्नति के साथ ही यादव परिवार के भीतर का तनाव भी सतह पर आ गया है. तेजस्वी के बड़े भाई तेज प्रताप यादव को गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार के कारण पार्टी से 6 साल के लिए निकाला जा चुका है. उन्होंने अपनी नई पार्टी जनशक्ति जनता दल (JJD) बनाई, लेकिन महुआ सीट से उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा. तेजस्वी की बड़ी बहन रोहिणी आचार्य ने भी विधानसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन को लेकर परोक्ष रूप से तेजस्वी पर निशाना साधा है, जिससे पार्टी और परिवार के भीतर अस्थिरता की खबरें तेज हैं.

पार्टी पर अब तेजस्वी का पूर्ण नियंत्रण

राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद अब तेजस्वी यादव के पास पार्टी के रोजमर्रा के कामकाज, टिकट वितरण और रणनीतिक फैसलों में लालू यादव के बराबर अधिकार होंगे. जानकारों का मानना है कि लालू यादव ने अपनी गिरती सेहत और पारिवारिक खींचतान को देखते हुए यह फैसला लिया है ताकि तेजस्वी को पार्टी के भीतर किसी भी चुनौती का सामना न करना पड़े.

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