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भाद्रपद में इन 4 उपायों को न करें नजरअंदाज, सुख-समृद्धि के लिए माने जाते हैं शुभ

किसी काम में बार-बार रुकावट आ रही है तो भाद्रपद माह में गौसेवा को शुभ माना जाता है.

Calendar Last Updated : 29 August 2026, 12:53 PM IST
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नई दिल्ली: सनातन परंपरा में भाद्रपद माह को बेहद पवित्र माना जाता है. इस दौरान भगवान श्रीकृष्ण और गणपति की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस महीने में पूजा-पाठ, दान और सेवा जैसे शुभ कार्य करने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है. इस साल भाद्रपद माह 29 अगस्त से 26 सितंबर 2026 तक रहेगा. आइए जानते हैं इस दौरान किए जाने वाले चार आसान उपायों के बारे मे.

1. काम में सफलता के लिए करें गौसेवा

अगर किसी काम में बार-बार रुकावट आ रही है तो भाद्रपद माह में गौसेवा को शुभ माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, गौशाला में हरी घास का दान करें और नियमित रूप से गायों की सेवा करें. सामर्थ्य हो तो वृंदावन या गोवर्धन की यात्रा और परिक्रमा भी की जा सकती है. मान्यता है कि इससे कार्यों में आने वाली बाधाएं कम होती हैं.

2. श्रीकृष्ण को लगाएं खीर का भोग

करियर या कारोबार में तरक्की की कामना रखने वाले लोग इस महीने भगवान श्रीकृष्ण को खीर का भोग अर्पित कर सकते हैं. भोग में तुलसी दल शामिल करें और पूजा के बाद खीर जरूरतमंद लोगों में बांटें. धार्मिक परंपरा में श्रीकृष्ण को सफेद धागा अर्पित करने की बात भी कही गई है, जिसे बाद में धारण किया जा सकता है.

3. सौभाग्य के लिए मंदिर में चढ़ाएं सफेद फूल

भाद्रपद माह में रोज या अपनी सुविधा के अनुसार नियमित रूप से श्रीकृष्ण मंदिर जाकर दर्शन करें. पूजा के दौरान भगवान को सफेद फूल अर्पित करें. मान्यता के अनुसार, श्रद्धा से पूजा करने और फूल अर्पित करने से जीवन में शुभता और सौभाग्य बढ़ता है.

4. मंगलवार-शनिवार करें हनुमान जी की पूजा

अगर किसी तरह की बाधा या विरोध से परेशान हैं तो भाद्रपद माह के मंगलवार और शनिवार को हनुमान जी की पूजा करें. धार्मिक मान्यता में मोर पंख पर सिंदूर लगाकर हनुमान जी को अर्पित करने का उपाय बताया गया है. अगले दिन इसे बहते जल में प्रवाहित करने की परंपरा भी कुछ स्थानों पर प्रचलित है. इन उपायों को धार्मिक मान्यताओं और आस्था के आधार पर किया जाता है. इनके परिणाम व्यक्ति की श्रद्धा और परंपरा पर निर्भर माने जाते हैं.

डिस्क्लेमर: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और प्रचलित परंपराओं पर आधारित है. अलग-अलग क्षेत्रों और समुदायों में पूजा-विधि तथा मान्यताएं अलग हो सकती हैं. इसे सामान्य धार्मिक जानकारी के रूप में लें.

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