Courtesy: X (@abhijeet_dipke)
नई दिल्ली: देश के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में शुमार आईआईटी दिल्ली में एक 31 वर्षीय शोधार्थी छात्र ऋषिकेश कुमार की दर्दनाक मौत के बाद शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। इस दुखद घटना पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संयोजक अभिजीत दीपके ने बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए देश की पूरी शिक्षा प्रणाली के ढांचे पर करारा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जब देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान में ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं, तो यह साफ जाहिर होता है कि भारत की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह बदहाल हो चुकी है।
समस्याओं से अकेले जूझते हमारे युवा
अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि देश के सबसे बेहतरीन माने जाने वाले संस्थानों में भी विद्यार्थियों को उनकी समस्याओं के साथ अलग-थलग छोड़ दिया जाता है। जब कोई छात्र मानसिक तनाव या शैक्षणिक दबाव से गुजर रहा होता है, तो उसे ढांढस बंधाने या उसकी चुनौतियों को समझने के बजाय संघर्ष करने के लिए अकेला छोड़ दिया जाता है।
उन्होंने कहा कि समय रहते छात्रों के संकट को पहचानना और उन्हें मजबूत प्रशासनिक व मानसिक समर्थन देना ही इस तरह की त्रासदियों को रोक सकता है।
छात्रों में भविष्य को लेकर बना खौफ का माहौल
ऋषिकेश कुमार की खुदकुशी पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए अभिजीत दीपके ने कहा कि आज हमारे देश के युवा और छात्र भविष्य की अनिश्चितताओं को लेकर भयंकर मानसिक दबाव में जी रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज एक ऐसे संवेदनशील और सहयोगी माहौल को तैयार करने की सख्त जरूरत है, जहां छात्रों के दिलों से डर दूर हो सके और उन्हें हर मोड़ पर उचित मार्गदर्शन मिले।
दीपके के मुताबिक, आईआईटी जैसे प्रीमियम संस्थानों में पिछले सालों के भीतर 65 से अधिक विद्यार्थियों का आत्महत्या जैसा कदम उठाना कोई सामान्य बात नहीं है, बल्कि यह एक गहरी संस्थागत विफलता की ओर इशारा करता है।
हादसे की जांच के लिए समिति का गठन
उल्लेखनीय है कि 22 अगस्त को आईआईटी दिल्ली के लेक्चर हॉल कॉम्प्लेक्स की छठी मंजिल से गिरकर ऋषिकेश की मौत हो गई थी। पुलिस जांच के दौरान मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है, जिससे घटना के कारणों को लेकर असमंजस बना हुआ है। मामले की गंभीरता को देखते हुए आईआईटी दिल्ली प्रशासन ने निष्पक्ष जांच के लिए एक एक्सटर्नल इंक्वायरी कमेटी का गठन किया है। इस जांच पैनल में दिल्ली हाईकोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता, एम्स के प्रोफेसर प्रताप शरण, संस्थान के रजिस्ट्रार और छात्रों के चार प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है।
कॉरपोरेट कर्ज माफी
मामले पर बोलते हुए अभिजीत दीपके ने उद्योगपति सुभाष चंद्रा से जुड़े वित्तीय समझौतों का उदाहरण देते हुए तीखा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जहां 22 हजार करोड़ रुपये के भारी-भरकम कर्ज को सेटल करके महज 6 करोड़ रुपये में निपटा दिया जाता है, वहीं देश का आम नागरिक मामूली लोन के ब्याज तले दबा रहता है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी सामान्य व्यक्ति पर 50 लाख रुपये का होम लोन हो, तो क्या बैंक उसे 50 हजार रुपये में माफ कर देगा?