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नई दिल्ली: आज गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व पूरे देश में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है. सनातन धर्म में इस दिन का विशेष महत्व है, क्योंकि यह गुरु-शिष्य परंपरा को समर्पित माना जाता है. इसी दिन महर्षि वेद व्यास की जयंती भी मनाई जाती है, जिन्हें वेदों का विभाजन करने और अनेक पुराणों की रचना करने के कारण आदिगुरु का सम्मान प्राप्त है. गुरु पूर्णिमा केवल धार्मिक अनुष्ठान का दिन नहीं है, बल्कि अपने गुरु के प्रति सम्मान, आभार और समर्पण प्रकट करने का अवसर भी है. मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से गुरु का आशीर्वाद लेने से जीवन में ज्ञान, सफलता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुरु पूर्णिमा आत्मचिंतन और आत्मिक उन्नति का पर्व है. इस दिन शिष्य अपने भीतर मौजूद अहंकार, बुराइयों और नकारात्मक विचारों को त्यागने का संकल्प लेता है. गुरु को वह शक्ति माना गया है जो व्यक्ति को अज्ञान के अंधकार से निकालकर ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाती है. इसलिए इस दिन गुरु का सम्मान करना और उनका आशीर्वाद प्राप्त करना अत्यंत शुभ माना जाता है.
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर स्नान और दान का शुभ समय सुबह 4 बजकर 17 मिनट से 4 बजकर 59 मिनट तक रहा.
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12 बजे से 12 बजकर 55 मिनट तक.
अमृत चौघड़िया मुहूर्त: सुबह 7 बजकर 30 मिनट से 9 बजे तक.
इन शुभ समयों में पूजा, दान और धार्मिक कार्य करने का विशेष महत्व माना गया है.
द्रिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष आषाढ़ पूर्णिमा तिथि का आरंभ 28 जुलाई की शाम 6 बजकर 18 मिनट पर हुआ था. इसका समापन 29 जुलाई रात 8 बजकर 5 मिनट पर होगा. उदया तिथि के आधार पर आज ही गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जा रहा है.
इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें. यदि पवित्र नदी में स्नान संभव न हो तो घर पर स्नान के जल में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करना शुभ माना जाता है. इसके बाद स्वच्छ वस्त्र पहनकर व्रत का संकल्प लें. घर के मंदिर में पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें. सबसे पहले भगवान विष्णु, महर्षि वेद व्यास और अपने इष्ट देव का ध्यान करें. इसके बाद अपने गुरु की श्रद्धापूर्वक पूजा करें. रोली, चंदन, अक्षत, पीले पुष्प और पीली मिठाई अर्पित करें. पूजन के बाद 'ॐ गुरुवे नमः' या गुरु द्वारा दिए गए मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें. फिर आरती करें, गुरु का आशीर्वाद लें और अपनी श्रद्धा के अनुसार दक्षिणा, वस्त्र या अन्य उपयोगी वस्तुएं भेंट करें.
ज्ञान और विद्या की प्राप्ति के लिए- विद्यार्थियों को इस दिन अपने गुरु को पीले वस्त्र, पीली मिठाई, हल्दी या चने की दाल भेंट करनी चाहिए. ऐसा करने से शिक्षा और ज्ञान में सफलता मिलने की मान्यता है.
गुरु ग्रह को मजबूत करने के लिए- गुरु पूर्णिमा के दिन पीपल के वृक्ष में जल अर्पित करें और उसकी सात बार परिक्रमा करें. धार्मिक मान्यता है कि पीपल में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास होता है. इससे गुरु ग्रह मजबूत होता है और भाग्य का साथ मिलता है.
सुख-समृद्धि के लिए- जरूरतमंद लोगों को पीले फल, चने की दाल, केसर वाली खीर, धार्मिक पुस्तकें या वस्त्र दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इससे घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है.
मानसिक शांति के लिए- यदि मन अशांत रहता है या तनाव अधिक है, तो शिवलिंग पर जल में थोड़ा केसर मिलाकर अर्पित करें और 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें. धार्मिक विश्वास है कि इससे मन को शांति मिलती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.
गुरु पूर्णिमा का यह पावन पर्व हमें अपने जीवन में गुरु के महत्व को समझने और उनके प्रति सम्मान व्यक्त करने की प्रेरणा देता है. इस दिन श्रद्धा, सेवा और सत्कर्म के साथ की गई पूजा को विशेष फलदायी माना गया है. गुरु का आशीर्वाद जीवन की दिशा बदलने वाला माना जाता है, इसलिए इस अवसर पर पूरे मन से उनका सम्मान करें और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लें.