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नई दिल्ली: पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में जारी विरोध प्रदर्शनों को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिसने नया विवाद खड़ा कर दिया है. उन्होंने कहा कि इस्लामाबाद सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले लोगों को वह भारत की तरह पाकिस्तान का दुश्मन मानते हैं.
इतना ही नहीं, उन्होंने प्रदर्शनकारियों से किसी भी तरह की बातचीत की संभावना से भी इनकार कर दिया. उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब पीओके में सुरक्षा बलों की कार्रवाई को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं.
स्थानीय संगठनों के अनुसार, ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेतृत्व में हजारों लोग रावलकोट से मुजफ्फराबाद की ओर शांतिपूर्ण मार्च निकाल रहे थे. प्रदर्शनकारी पीओके विधानसभा में कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों को समाप्त करने की मांग कर रहे थे. उनका आरोप है कि इन सीटों के कारण स्थानीय लोगों के राजनीतिक अधिकार कमजोर हो रहे हैं.
प्रदर्शनकारियों का दावा है कि मार्च के दौरान सुरक्षा बलों ने अचानक गोलीबारी कर दी, जिसमें कम से कम 14 कार्यकर्ताओं की मौत हो गई और दो दर्जन से अधिक लोग घायल हुए. मृतकों में JAAC के संस्थापक सदस्य उमर नजीर के छोटे भाई उस्मान नजीर भी शामिल बताए गए हैं.
दूसरी ओर, पाकिस्तान सरकार ने प्रदर्शनकारियों के आरोपों को स्वीकार नहीं किया है. अधिकारियों का कहना है कि प्रदर्शनकारियों के पास आधुनिक हथियार थे और उन्होंने पहले सुरक्षा बलों पर हमला किया. इसके बाद जवाबी कार्रवाई की गई. हालांकि, दोनों पक्षों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि अब तक नहीं हो सकी है.
पीओके में पिछले कई सप्ताह से विरोध प्रदर्शन जारी हैं. विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, 5 जून से शुरू हुए आंदोलन और उसके बाद हुई हिंसा में 80 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है. हालिया घटनाओं के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है.
इसी बीच पाकिस्तान ने पीओके में तथाकथित विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ाई है. कई जगह हिंसा और कथित चुनावी गड़बड़ियों की खबरें सामने आई हैं. भारत ने इन चुनावों को अवैध कब्जे को वैध ठहराने की कोशिश बताया है.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का पूरा क्षेत्र, जिसमें पाकिस्तान के कब्जे वाले इलाके भी शामिल हैं, भारत का अभिन्न हिस्सा है. उन्होंने यह भी कहा कि पीओके में हो रहे विरोध प्रदर्शन वहां के लोगों के आर्थिक शोषण, अधिकारों के हनन और प्रशासनिक दमन का परिणाम हैं.