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व्हाइट हाउस मीटिंग के बाद बढ़ा तनाव! ईरान ने अमेरिकी बेस पर मिसाइल दागने का किया दावा

अमेरिका का दावा है कि ईरान की IRGC ने मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर बैलिस्टिक मिसाइलों से 'सरप्राइज अटैक' करने की कोशिश की, लेकिन सभी मिसाइलों को इंटरसेप्ट कर दिया गया.

Calendar Last Updated : 29 July 2026, 12:02 PM IST
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नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है. अमेरिका ने दावा किया है कि ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने मध्य पूर्व में तैनात अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर बैलिस्टिक मिसाइलें दागी. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार यह हमला अचानक किया गया, लेकिन सभी मिसाइलों को समय रहते इंटरसेप्ट कर लिया गया. इस वजह से किसी भी अमेरिकी सैन्य ठिकाने को नुकसान नहीं पहुंचा और कोई हताहत भी नहीं हुआ.

CENTCOM ने क्या कहा?

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि ईरान की ओर से कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गई थी. अमेरिकी वायु रक्षा प्रणाली पूरी तरह सक्रिय थी और उसने सभी मिसाइलों को लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही नष्ट कर दिया. CENTCOM ने यह भी कहा कि क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैनिक पूरी तरह सतर्क हैं और किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए तैयार हैं.

जॉर्डन के अमेरिकी बेस को बताया गया निशाना

अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने जॉर्डन में स्थित एक अमेरिकी सैन्य अड्डे की दिशा में मिसाइलें दागी. इसे हाल के दिनों में अमेरिकी ठिकानों पर सबसे बड़ी सैन्य कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है. हालांकि शुरुआती जानकारी के मुताबिक इस घटना में किसी तरह के जान-माल के नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है.

कुवैत और कतर ने जताई चिंता

हमले के बाद खाड़ी देशों ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी. कुवैत ने इस कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा कि इससे क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा को खतरा पैदा हो सकता है. वहीं कतर ने जॉर्डन की संप्रभुता का समर्थन करते हुए कहा कि किसी भी देश की क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन स्वीकार नहीं किया जा सकता. दोनों देशों ने तनाव कम करने की अपील भी की.

ट्रंप-नेतन्याहू बैठक के बाद सामने आई घटना

यह घटनाक्रम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की बैठक के कुछ घंटे बाद सामने आया. दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत में ईरान, परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई थी. इसके तुरंत बाद मिसाइल हमले की खबर ने हालात को और गंभीर बना दिया.

पहले भी दे चुके हैं सैन्य कार्रवाई की चेतावनी

इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि यदि ईरान के साथ बातचीत सफल नहीं होती है तो अमेरिका दोबारा सैन्य कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा. उन्होंने संकेत दिया था कि जरूरत पड़ने पर ईरान के अहम बुनियादी ढांचे को भी निशाना बनाया जा सकता है.

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