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नई दिल्ली: हर साल रक्षाबंधन का त्योहार नजदीक आते ही बहनों के मन में राखी बांधने की सही तारीख को लेकर संशय खड़ा हो जाता है। इस बार भी लोगों के बीच 27 और 28 अगस्त की तिथियों को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। इस भ्रम का मुख्य कारण सावन पूर्णिमा के दिन लगने वाला साल का आखिरी चंद्र ग्रहण है। कई लोगों को यह आशंका है कि ग्रहण और सूतक काल के कारण त्योहार की तारीख प्रभावित हो सकती है। ज्योतिषीय गणना और पंचांग के अनुसार स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो चुकी है, जिससे यह भ्रम दूर हो गया है। 27 अगस्त को रक्षाबंधन का त्योहार मनाने के लिए पंचांग में दो विशेष शुभ मुहूर्त बताए गए हैं। पहला मुहूर्त शाम 6 बजकर 03 मिनट से शाम 6 बजकर 15 मिनट तक रहेगा।
राखी बांधने के लिए दो शुभ मुहूर्त
27 अगस्त को रक्षाबंधन का त्योहार मनाने के लिए पंचांग में दो विशेष शुभ मुहूर्त बताए गए हैं। पहला मुहूर्त शाम 6 बजकर 03 मिनट से शाम 6 बजकर 15 मिनट तक रहेगा, जो संक्षिप्त लेकिन बेहद शुभ है।
जिन लोगों के लिए शाम के समय राखी बांधना संभव न हो, वे दूसरे मुहूर्त का उपयोग कर सकते हैं। दूसरा शुभ समय रात 8 बजकर 55 मिनट से शुरू होकर रात 11 बजकर 03 मिनट तक रहेगा।
चंद्र ग्रहण और सूतक काल का कितना होगा असर
भारतीय समयानुसार साल का अंतिम चंद्र ग्रहण 28 अगस्त की सुबह 6 बजकर 53 मिनट से दोपहर 12 बजकर 32 मिनट तक लगेगा। इसका सूतक काल ग्रहण से 9 घंटे पहले यानी 27 अगस्त की रात 9 बजकर 53 मिनट से शुरू होना चाहिए। लेकिन राहत की बात यह है कि यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो ग्रहण दृश्यमान नहीं होता, उसका सूतक काल और धार्मिक प्रभाव भी मान्य नहीं होता है। यही वजह है कि चंद्र ग्रहण का रक्षाबंधन के पर्व पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा और 27 अगस्त को पूरे उत्साह के साथ यह त्योहार मनाया जाएगा।
हिंदू पंचांग के अनुसार सावन माह की पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त को सुबह 5 बजकर 38 मिनट से प्रारंभ होकर 28 अगस्त की सुबह 6 बजकर 18 मिनट तक रहेगी। भद्रा रहित शुभ समय और तिथियों के समीकरण को देखते हुए इस साल रक्षाबंधन का पावन पर्व 27 अगस्त को ही मनाया जाएगा। इसी दिन बहनें पूरे विधि-विधान के साथ अपने भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र बांध सकेंगी।