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बंदर और बाघ के बाद अब कर्नाटक में मोरों की रहस्यमय मौत, वन्यजीव संरक्षण पर उठने लगे सवाल

संरक्षणवादी और वन अधिकारी इस स्थिति पर चिंता जता रहे हैं. उन्होंने कड़ी निगरानी और गश्त बढ़ाने की मांग की है. सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रम चलाने की जरूरत बताई गई है. अधिकारियों से अपराधियों को जल्द पकड़ने और सजा देने की अपील की गई है.

Calendar Last Updated : 04 August 2025, 12:56 PM IST
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Karnataka Peacocks Death: कर्नाटक के तुमकुर जिले में एक दुखद घटना ने सबको चौंका दिया. मधुगिरी तालुका के हनुमंतपुरा गांव में 19 मोर रहस्यमय परिस्थितियों में मृत पाए गए. इनमें 5 नर और 14 मादा मोर शामिल थे. पहला मृत मोर 2 अगस्त को केरे कोडी झरने के पास देखा गया. स्थानीय किसानों ने खेतों में बिखरे शव देखे. इस घटना ने वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है.

ग्रामीणों को शक है कि 1 अगस्त की रात को मोरों की मौत हुई. सटीक कारण अभी पता नहीं चला. वन अधिकारियों ने तुरंत घटनास्थल का दौरा किया. मृत मोरों के शव एकत्र किए गए. स्थानीय मजिस्ट्रेट की अनुमति के बाद शवों को फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) भेजा गया. आधिकारिक रिपोर्ट का इंतजार है.

वन्यजीवों पर लगातार बढ़ रहा खतरा  

यह घटना कर्नाटक में वन्यजीवों की लगातार हो रही मौतों का हिस्सा है. 2 जुलाई को चामराजनगर जिले में 20 बंदरों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी. अधिकारियों को जहर देने का शक है. जून में माले महादेश्वर हिल्स अभयारण्य में एक बाघिन और उसके चार शावकों की मौत ने हड़कंप मचा दिया था. बाघिन ने जहर मिली गाय का शव खाया था, जिससे उनकी मौत हुई. स्थानीय लोगों पर जहर देने का आरोप है. कर्नाटक में सांपों और हाथियों की मौत की घटनाएं भी बढ़ रही हैं. ये मामले अक्सर मानव-पशु संघर्ष और जानबूझकर जहर देने से जुड़े हैं. अवैध शिकार, जंगल की कटाई और मानव अतिक्रमण से वन्यजीवों का जीवन खतरे में है. मोरों की मौत ने इन खतरों को फिर से उजागर किया है. 

वन्यजीव संरक्षण कानून की मांग 

संरक्षणवादी और वन अधिकारी इस स्थिति पर चिंता जता रहे हैं. उन्होंने कड़ी निगरानी और गश्त बढ़ाने की मांग की है. सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रम चलाने की जरूरत बताई गई है. अधिकारियों से अपराधियों को जल्द पकड़ने और सजा देने की अपील की गई है. कर्नाटक की समृद्ध जैव विविधता को बचाने के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत है. राज्य सरकार से वन्यजीव संरक्षण कानूनों को और सख्त करने की मांग हो रही है. वन विभाग को संसाधन बढ़ाने की जरूरत है. मोरों की मौत की जांच तेज की गई है. कर्नाटक की जैव विविधता को बचाना अब समय की मांग है.

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