वैलेंटाइन डे डिनर के बाद खौफनाक हत्या! CA पति ने कैंची से काटा पत्नी का गला, 18 घंटे में पुलिस ने खोला राज

वैलेंटाइन डे को प्यार और भरोसे का प्रतीक माना जाता है, लेकिन हरियाणा में यह खून की खौफनाक आपदा में बदल गया. हरियाणा में एक नवविवाहित जोड़े के लिए वैलेंटाइन डे एक खौफनाक सपने जैसा बन गया.

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Courtesy: @Delhiite_ X account

वैलेंटाइन डे को प्यार और भरोसे का प्रतीक माना जाता है, लेकिन हरियाणा में यह खून की खौफनाक आपदा में बदल गया. हरियाणा में एक नवविवाहित जोड़े के लिए वैलेंटाइन डे एक खौफनाक सपने जैसा बन गया. हरियाणा के बहादुरगढ़ से एक मामला सामने आ रहा है, जहां बैंक कर्मचारी महक की हत्या ने इलाके में सनसनी फैला दी. 

शुरुआत में इसे लूटपाट की घटना बताया गया जा रहा था, लेकिन झज्जर पुलिस ने महज 18 घंटे के अंदर सच्चाई उजागर कर दी. जांच में सामने आया कि यह वारदात किसी बाहरी हमलावर की नहीं, बल्कि उसके पति अंशुल धवन की ही सोची समझी साजिश थी.

लूट की कहानी से शुरू हुआ मामला

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि रविवार रात करीब 11 बजे अंशुल ने पुलिस को फोन कर दावा किया कि कुछ अंजान लोगों ने उन पर हमला किया और पत्नी की हत्या कर दी. उसने इसे डकैती का रूप देने की कोशिश की. हालांकि पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी. लेकिन शुरुआती पूछताछ में ही उसके बयान विरोधाभास पाए गए. जिसके बाप पुलिस को पति पर शक हुआ. 

बदलते बयान ने बढ़ाया शक

जांच अधिकारियों ने पाया कि अंशुल बार-बार अपनी कहानी बदल रहा था और कथित हमलावरों के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दे पा रहा था. उसकी इस हरकत पुलिस का शक गहराया. पुलिस ने फिर इसी दिशा में जांच करते हुए पति से सख्ती से पूछताछ की. जिसके बाद उसने अपना अपराध स्वीकार कर लिया.

शक बना हत्या की वजह

पुलिस तफतीश में सामने आया कि अंशुल अपनी पत्नी के चरित्र को लेकर लंबे समय से शक कर रहा था, इस कारण ही दोनों के बीच अक्सर लड़ाई झगड़े होते थे. इसी अविश्वास ने अंततः इस जघन्य अपराध का रूप ले लिया. हत्या के दौरान उसने पहचान छिपाने और सबूत न छोड़ने के लिए दस्ताने पहने थे. बता दें अंशुल ने पहले पत्नी का गला घोंटा और फिर बाद में कैंची से उसका गला काट दिया. 

शादी को हुए थे कुछ ही महीने

हिसार के रहने वाले अंशुल और हांसी की निवासी महक की शादी पिछले साल 25 सितंबर को हुई थी. वह गुरुग्राम में एचडीएफसी बैंक में काम करती थीं. उनके पिता कृष्ण कथूरिया को भी शुरुआत से ही दामाद पर शक था.

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