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पूजा पाल समाजवादी से निष्कासित, सीएम योगी की तारीफ में पढ़े थे कसीदे

उत्तर प्रदेश विधानसभा में बुधवार को ‘विज़न डॉक्यूमेंट 2047’पर 24 घंटे चली मैराथन चर्चा के दौरान पूजा पाल ने कहा कि सब जानते हैं कि मेरे पति की हत्या किसने की.

Calendar Last Updated : 14 August 2025, 03:23 PM IST
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Pooja Pal: समाजवादी पार्टी ने गुरुवार को अपनी विधायक पूजा पाल को पार्टी विरोधी गतिविधियों और अनुशासनहीनता के आरोप में तत्काल प्रभाव से निष्कासित कर दिया. यह कार्रवाई उस वक्त हुई जब एक दिन पहले ही उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अपराध-विरोधी नीतियों की खुलकर सराहना की थी.

उत्तर प्रदेश विधानसभा में बुधवार को ‘विज़न डॉक्यूमेंट 2047’पर 24 घंटे चली मैराथन चर्चा के दौरान पूजा पाल ने कहा कि सब जानते हैं कि मेरे पति की हत्या किसने की.

पूरे राज्य को मुख्यमंत्री पर भरोसा

पूजा पाल ने कहा कि मैं मुख्यमंत्री को धन्यवाद देना चाहती हूं कि उन्होंने मुझे न्याय दिलाया और मेरी बात तब सुनी जब किसी और ने नहीं सुनी. उनकी शून्य-सहिष्णुता नीति से प्रयागराज में मेरे जैसी कई महिलाओं को न्याय मिला, जिसके कारण अतीक अहमद जैसे अपराधी मारे गए. उन्होंने आगे कहा कि आज पूरा राज्य मुख्यमंत्री पर भरोसे की नजर से देखता है.

पार्टी से किया गया निष्कासित

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पूजा पाल को भेजे पत्र में लिखा कि आपके द्वारा की गई कार्रवाई पार्टी के विरुद्ध है और यह अनुशासन का गंभीर उल्लंघन है. इसलिए, आपको समाजवादी पार्टी से तत्काल प्रभाव से निष्कासित किया जाता है. साथ ही, आप सभी पदों से हटाई जाती हैं और पार्टी के किसी भी कार्यक्रम या बैठक में शामिल नहीं होंगी.

क्या है पूरा मामला?

पूजा पाल के पति और पूर्व बसपा विधायक राजू पाल की 2005 में प्रयागराज में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. इस मामले में गैंगस्टर-नेता अतीक अहमद मुख्य आरोपी थे. फरवरी 2023 में, इस हत्याकांड के अहम गवाह उमेश पाल की भी प्रयागराज के सुलेम सराय इलाके में हत्या कर दी गई. इस वारदात में अतीक अहमद और उनके भाई अशरफ अहमद पर आरोप लगा. दोनों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था. अप्रैल 2023 में, मेडिकल जांच के लिए ले जाते समय प्रयागराज में पुलिस सुरक्षा के बीच अज्ञात हमलावरों ने अतीक और अशरफ की गोली मारकर हत्या कर दी थी.

पूजा पाल के इस बयान और उसके बाद हुए निष्कासन ने यूपी की राजनीति में हलचल मचा दी है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सत्तारूढ़ भाजपा के प्रति उनके इस खुले समर्थन से सपा नेतृत्व असहज हो गया, जिसके चलते यह सख्त कदम उठाया गया.

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