menu-icon
The Bharatvarsh News

ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर किया सख्ती, अंतरराष्ट्रीय जहाजों से शुल्क वसूलने की योजना को दी मंजूरी

ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति ने इस जलडमरूमध्य से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय जहाजों से शुल्क वसूलने की योजना के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

Calendar Last Updated : 25 August 2026, 11:03 AM IST
Share:

नई दिल्ली: पूंजी के संकट और गंभीर आर्थिक प्रतिबंधों से जूझ रहे ईरान ने वैश्विक व्यापार के सबसे संवेदनशील समुद्री गलियारे 'होर्मुज स्ट्रेट' को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति ने इस जलमार्ग से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर विभिन्न सेवाओं के एवज में शुल्क लगाने से जुड़े प्रस्ताव को आगे बढ़ा दिया है। तेहरान के इस फैसले को गिरते रियाल को संभालने और अपने देश पर बने अमेरिकी आर्थिक दबाव से निपटने के एक अहम रणनीतिक प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। कई देश अमरीकी प्रतिबंधों के डर से ईरान को किसी भी प्रकार का सीधा भुगतान करने से कतरा सकते हैं। 

सेवाओं के नाम पर नया शुल्क ढांचा

प्रस्तावित रणनीतिक योजना के तीसरे अनुच्छेद के तहत ईरान उन सभी जहाजों से फीस वसूलने की तैयारी में है जो उसके अधिकार क्षेत्र से गुजरते वक्त समुद्री नेविगेशन, पर्यावरणीय सुरक्षा, बीमा और तटीय सुरक्षा जैसी सुविधाओं का लाभ लेते हैं। 
विशेष परिस्थितियों में जहाजों को मिलने वाले ईंधन और अन्य तकनीकी मदद के लिए भी अलग से शुल्क तय किया जाएगा। यह टोल केवल उन्हीं देशों के जहाजों पर लागू होगा जिन्हें इस मार्ग से गुजरने की आधिकारिक इजाजत है। 

अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून और ईरान का रुख

होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाने की वैधता को लेकर अंतरराष्ट्रीय कानून विशेषज्ञ सवाल उठा रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र के 'समुद्र के कानून से संबंधित कन्वेंशन' (UNCLOS) के नियमों के अनुसार, किसी भी देश को अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में जहाजों की आवाजाही रोकने या उन पर सामान्य टोल लगाने का अधिकार नहीं है। हालांकि, यही कानून कुछ विशिष्ट सेवाओं के बदले पारिश्रमिक लेने की इजाजत भी देता है। ईरान इसी कानूनी प्रावधान का सहारा लेकर सुरक्षा और नेविगेशन सेवाओं के नाम पर जहाजों से राशि वसूलने की वकालत कर रहा है।

खस्ताहाल अर्थव्यवस्था और बढ़ता क्षेत्रीय तनाव

ईरान का यह कदम ऐसे समय में सामने आया है जब उसकी राष्ट्रीय मुद्रा रियाल ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच चुकी है और नकदी की किल्लत बेहद बढ़ गई है। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि इस योजना को धरातल पर उतारना आसान नहीं होगा। कई देश अमरीकी प्रतिबंधों के डर से ईरान को किसी भी प्रकार का सीधा भुगतान करने से कतरा सकते हैं। यदि यह योजना पूरी तरह लागू होती है, तो न केवल वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होगी, बल्कि खाड़ी क्षेत्र में कूटनीतिक और सैन्य तनाव और गहराने का अंदेशा बढ़ जाएगा। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति ने इस जलमार्ग से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर विभिन्न सेवाओं के एवज में शुल्क लगाने से जुड़े प्रस्ताव को आगे बढ़ा दिया है।

सम्बंधित खबर

Recent News