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खालिदा जिया ने 80 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस, बांग्लादेश के लिए एक युग का अंत

बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री और प्रमुख विपक्षी दल बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की चेयरपर्सन बेगम खालिदा जिया का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया.

Calendar Last Updated : 30 December 2025, 07:21 AM IST
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बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री और प्रमुख विपक्षी दल बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की चेयरपर्सन बेगम खालिदा जिया का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया. वह 80 वर्ष की थीं. बीएनपी ने आधिकारिक रूप से घोषणा की कि उनकी नेता का मंगलवार सुबह करीब 6 बजे ढाका के एवरकेयर अस्पताल में अंतिम सांस ली. 

इस दुखद खबर से बांग्लादेश की राजनीति में शोक की लहर दौड़ गई है. खालिदा जिया तीन बार प्रधानमंत्री रह चुकी थीं और देश की लोकतंत्र की प्रतीक मानी जाती थीं.

लंबी बीमारी और अस्पताल में भर्ती

खालिदा जिया पिछले कई वर्षों से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही थीं. उन्हें लिवर सिरोसिस, गठिया, मधुमेह (डायबिटीज), किडनी की समस्या, फेफड़ों और दिल से जुड़ी जटिलताएं तथा आंखों की पुरानी बीमारियां थीं. 23 नवंबर को दिल और फेफड़ों में संक्रमण के कारण उन्हें एवरकेयर अस्पताल में भर्ती कराया गया था. वहां वह पिछले 36 दिनों से लगातार इलाज करा रही थीं.

अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट प्रोफेसर शहाबुद्दीन तालुकदार की अगुवाई में एक विशेष मेडिकल बोर्ड गठित किया गया था, जिसमें बांग्लादेश के अलावा ब्रिटेन, अमेरिका, चीन और ऑस्ट्रेलिया के विशेषज्ञ डॉक्टर शामिल थे. बोर्ड ने उनकी स्थिति पर लगातार निगरानी रखी, लेकिन उम्र और कई बीमारियों के कारण हालत लगातार बिगड़ती गई.

विदेश इलाज की कोशिश नाकाम

इस महीने की शुरुआत में खालिदा जिया को बेहतर चिकित्सा सुविधाओं के लिए विदेश ले जाने की योजना बनाई गई थी. उनके परिवार और पार्टी नेताओं ने इसकी जोरदार कोशिश की, लेकिन डॉक्टरों ने उनकी नाजुक हालत का हवाला देते हुए यात्रा को जोखिम भरा बताया. अंततः यह योजना छोड़ दी गई और इलाज ढाका में ही जारी रखा गया. उनकी स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि जीवन रक्षक प्रणालियों पर निर्भरता बढ़ गई.

खालिदा जिया बांग्लादेश की राजनीति की दिग्गज नेता थीं. वह स्वर्गीय राष्ट्रपति जियाउर रहमान की पत्नी थीं और उनके निधन के बाद बीएनपी की कमान संभाली. उन्होंने 1991-1996 और 2001-2006 तक दो बार प्रधानमंत्री का पद संभाला. उनकी नेतृत्व में बीएनपी ने कई महत्वपूर्ण चुनाव जीते और लोकतंत्र की लड़ाई लड़ी.

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