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नई दिल्ली: मेक्सिको में वर्षों से दहशत का पर्याय बने कुख्यात ड्रग सरगना एल मेनचो का अंत आखिरकार एक सैन्य अभियान में हो ही गया. देश के रक्षा मंत्रालय ने रविवार को इस बात की पुष्टि की कि दुनिया के सबसे खतरनाक तस्करों में शामिल नेमेसियो रुबेन ओसेगुएरा सर्वेंटेस, जिसे एल मेनचो के नाम से जाना जाता था, पश्चिमी राज्य जालिस्को में चलाए गए ऑपरेशन के दौरान घायल हुआ और बाद में उसकी मौत हो गई. उसकी मृत्यु की खबर फैलते ही कई इलाकों में हिंसा भड़क उठी.
मंत्रालय के अनुसार, सैन्य छापे में गंभीर रूप से घायल होने के बाद उसे हवाई मार्ग से मैक्सिको सिटी ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया. एल मेनचो कुख्यात जालिस्को न्यू जेनरेशन कार्टेल (सीजेएनजी) का प्रमुख था, जो पिछले एक दशक में मेक्सिको का सबसे ताकतवर आपराधिक गिरोह बनकर उभरा.
उसकी मौत के तुरंत बाद जालिस्को सहित कई राज्यों में आगजनी और सड़कों की नाकेबंदी की घटनाएं सामने आईं. पर्यटक शहर प्यूर्टो वल्लार्टा में धुएं के गुबार देखे गए, जबकि गुआडालाजारा में जलते वाहनों ने यातायात ठप कर दिया. स्थानीय प्रशासन ने लोगों से घरों में रहने की अपील की जा रही है.
राष्ट्रपति क्लाउडिया शाइनबाम ने कहा कि संघीय और राज्य सरकारें पूर्ण समन्वय के साथ काम कर रही हैं. यह अभियान उस समय हुआ जब डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन मेक्सिको पर नशीले पदार्थों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का दबाव बना रहा था.
अमेरिका ने एल मेनचो की गिरफ्तारी या दोषसिद्धि की सूचना देने पर 15 मिलियन डॉलर का इनाम घोषित किया था. अमेरिकी उप विदेश मंत्री क्रिस्टोफर लैंडौ ने इसे क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि बताया है.
अमेरिकी विदेश विभाग ने जालिस्को समेत तामाउलिपास, मिचोआकान, गुरेरो और नुएवो लियोन राज्यों में अपने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है. कनाडा ने भी अपने नागरिकों को एहतियात बरतने को कहा है.
एल मेनचो के नेतृत्व में सीजेएनजी एक स्थानीय गिरोह से अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क में बदल गया. यह संगठन भारी हथियारों और आक्रामक रणनीति के लिए कुख्यात रहा, और अक्सर इसकी तुलना सिनालोआ कार्टेल से की जाती रही है.