नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने दूसरे कार्यकाल में लिए गए सख्त और एकाएक फैसलों को लेकर एक बार फिर चर्चा में हैं. उन्होंने कई देशों पर भारी टैरिफ लगाए हैं, जिससे पूरी दुनिया में आर्थिक हलचल मच गई है. भारत भी इन देशों में शामिल है, जिस पर अमेरिका ने 50 प्रतिशत तक का टैरिफ लागू किया है.
अब ट्रंप के इन्हीं टैरिफ की वैधता को लेकर आज, 9 जनवरी को अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होने जा रही है. इस मामले में आने वाला फैसला न सिर्फ अमेरिका बल्कि भारत समेत 100 से ज्यादा देशों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
ट्रंप प्रशासन ने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट यानी IEEPA के तहत इन टैरिफ को लागू किया था. सवाल यह उठाया गया है कि क्या इस कानून के तहत राष्ट्रपति को इतने बड़े स्तर पर टैरिफ लगाने का अधिकार है या नहीं. इसी को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है.
अगर सुप्रीम कोर्ट ने टैरिफ को अवैध करार दिया, तो अमेरिकी सरकार को आयातकों को बड़ी रकम लौटानी पड़ सकती है. अनुमान है कि यह रकम 100 से 150 अरब डॉलर तक हो सकती है. ऐसे में अमेरिकी खजाने पर भारी आर्थिक बोझ पड़ने की आशंका है.
हालांकि जानकारों का मानना है कि कोर्ट का फैसला पूरी तरह से एकतरफा नहीं होगा. संभव है कि अदालत कोई बीच का रास्ता निकाले, जिससे सरकार के कुछ अधिकार बने रहें और कुछ सीमाएं भी तय की जाएं.
सूत्रों के मुताबिक, ट्रंप की टीम पहले से ही इसके विकल्पों पर काम कर रही है. अगर सुप्रीम कोर्ट का फैसला उनके खिलाफ आता है, तो वे दूसरे कानूनों और प्रावधानों के जरिए टैरिफ को किसी न किसी रूप में लागू रखने की कोशिश कर सकते है.
यह फैसला भारत के लिए भी बेहद अहम है. अमेरिका द्वारा लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ का असर भारतीय निर्यात और बाजारों पर साफ दिख रहा है. भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से व्यापार समझौते को लेकर बातचीत चल रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाया है.
इस बीच ट्रंप ने भारत को यह चेतावनी भी दी है कि अगर वह रूस से तेल खरीदना बंद नहीं करता है, तो टैरिफ और बढ़ाए जा सकते हैं. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का फैसला भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभा सकता है.