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नई दिल्ली: वेनेजुएला में इस सदी की सबसे बड़ी प्राकृतिक आपदा सामने आई है. बुधवार शाम देश के उत्तरी हिस्से में एक मिनट के अंदर दो बड़े भूकंप आए, जिससे चारों ओर तबाही मच गई. अब तक 188 लोगों की मौत की खबर है और 1,500 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हैं. कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने देश में आपातकाल की घोषणा कर दी है.
अधिकारियों ने बताया कि पहला भूकंप 7.2 तीव्रता का था. इसका केंद्र राजधानी काराकस से 170 किलोमीटर दूर मोरोन के पश्चिम में 22 किलोमीटर नीचे था. एक मिनट बाद, 7.5 तीव्रता का दूसरा और अधिक विनाशकारी झटका आया. इसका केंद्र मोरोन से 16 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में केवल 10 किलोमीटर की गहराई पर था.
इस दोहरे प्रहार का सबसे अधिक प्रभाव तटीय प्रांत ला गुएरा में देखा जा रहा है. यहां का मुख्य अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बुरी तरह क्षतिग्रस्त होकर बंद हो गया है, जिससे विदेशी राहत सामग्री के आने में मुश्किलें आ रही हैं. शहर की मेट्रो और गैस लाइनें पूरी तरह से बंद हैं.
प्रभावित शहरों में चीख-पुकार मची हुई है. बचाव दल सीमेंट के भारी स्लैब काटकर लोगों और जानवरों को बाहर निकाल रहे हैं. सरकारी टीवी पर दिखाए गए फुटेज में एक महिला को मलबे से जिंदा निकाला गया, जिसका सिर्फ एक पैर दिखाई दे रहा था. प्रशासन के खिलाफ स्थानीय लोगों का गुस्सा भी बढ़ रहा है. अपने 8 साल के लापता बेटे की तलाश में जुटी डायना डेलगाडो ने रोते हुए कहा, सरकार की भारी मशीनरी कहां है? हमारे पड़ोसी अपने हाथों से पत्थरों को हटा रहे हैं. अस्पतालों के बाहर लोग जमीन पर स्ट्रेचरों पर लेटे इलाज का इंतजार कर रहे हैं.
इस संकट की घड़ी में अंतरराष्ट्रीय समुदाय वेनेजुएला के साथ खड़ा है. भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरसंभव मदद का आश्वासन दिया है, जिसके लिए राष्ट्रपति रोड्रिगेज ने भारत का आभार जताया है. अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बचाव दल और चिकित्सा संसाधन भेजने की पुष्टि की है. कतर, मैक्सिको और अल साल्वाडोर देशों की बचाव टीमें और खोजी दस्ते वेनेजुएला के लिए रवाना हो चुके हैं. फिलहाल देश के सभी स्कूल बंद कर दिए गए हैं और उनके भवनों को अस्थायी राहत शिविरों में बदल दिया जा रहा है. लापता हजारों लोगों की तलाश के लिए बचाव अभियान युद्ध स्तर पर जारी है.