Courtesy: Gemini
नई दिल्ली: अक्सर लोग शिकायत करते हैं कि अच्छी कमाई होने के बावजूद महीने के आखिरी दिनों में पैसों की कमी महसूस होने लगती है. ऐसा ही कुछ दिल्ली में रहने वाले 26 वर्षीय राहुल (बदला हुआ नाम) के साथ भी हो रहा था. एक आईटी कंपनी में नौकरी करने वाले राहुल की सैलरी ठीक-ठाक थी, लेकिन हर महीने आखिरी सप्ताह आते-आते उनका बैंक बैलेंस लगभग खत्म हो जाता था.
कई महीनों तक यही स्थिति रहने के बाद उन्होंने अपने खर्चों का पूरा हिसाब रखने का फैसला किया। उन्होंने एक महीने तक हर छोटे-बड़े खर्च को डायरी में लिखना शुरू कर दिया.
महीने के अंत में जब राहुल ने अपनी डायरी देखी तो उन्हें सबसे बड़ा झटका लगा. उन्हें लगता था कि किराया, बिजली का बिल और दोस्तों के साथ घूमना-फिरना उनके बड़े खर्च हैं, लेकिन असलियत कुछ और थी.
ऑफिस के नीचे रोजाना पी जाने वाली चाय, समोसा, बिस्कुट और छोटे-छोटे स्नैक्स पर हर महीने लगभग 2,000 रुपये खर्च हो रहे थे. वहीं, छोटी दूरी के लिए बार-बार ऑटो और कैब का इस्तेमाल करने से करीब 3,500 रुपये अतिरिक्त खर्च हो रहे थे.
राहुल ने यह भी देखा कि उनके मोबाइल में कई ऐसे ओटीटी और अन्य ऐप्स के सब्सक्रिप्शन एक्टिव थे, जिनका वह शायद ही कभी इस्तेमाल करते थे. हर महीने इन पर पैसे कट रहे थे.
इसके अलावा ऑनलाइन शॉपिंग की आदत भी उनके बजट को नुकसान पहुंचा रही थी. फ्री डिलीवरी या डिस्काउंट के लालच में छोटी-छोटी चीजें मंगवाने से खर्च लगातार बढ़ रहा था.
राहुल का कहना है कि जब उन्होंने हर खर्च को लिखना शुरू किया, तो उन्हें समझ आने लगा कि पैसा कहां और कैसे निकल रहा है. रोज रात को खर्चों का हिसाब देखने से फिजूलखर्ची पर खुद ही नियंत्रण होने लगा.
इस आदत के बाद राहुल ने गैरजरूरी सब्सक्रिप्शन बंद कर दिए, छोटी दूरी के लिए मेट्रो और पैदल चलने को प्राथमिकता दी तथा बाहर से खाना मंगाना कम कर दिया. इसका असर यह हुआ कि महीने के अंत में उनके पास 10,000 से 15,000 रुपये तक की अतिरिक्त बचत रहने लगी.
अगर आप भी हर महीने पैसों की तंगी से परेशान रहते हैं, तो आज से ही अपने सभी खर्चों को नोट करना शुरू करें. चाहे खर्च 10 रुपये का हो या 2,000 रुपये का, हर भुगतान का रिकॉर्ड रखें. यह छोटी-सी आदत आपको बेहतर वित्तीय अनुशासन सिखा सकती है और आपकी बचत को बढ़ाने में मदद कर सकती है.