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गोवर्धन पूजा 2025: कब है, 21 या 22 अक्टूबर? जानें सही तारीख, महत्व और बहुत कुछ

Govardhan Puja 2025: गोवर्धन पूजा, जो आमतौर पर दिवाली के अगले दिन मनाई जाती है, इस साल 2025 में कुछ खास परिस्थितियों के कारण चर्चा में है. हिंदू पंचांग के अनुसार, यह पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है.

Calendar Last Updated : 21 October 2025, 12:39 PM IST
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Govardhan Puja 2025: गोवर्धन पूजा, जो आमतौर पर दिवाली के अगले दिन मनाई जाती है, इस साल 2025 में कुछ खास परिस्थितियों के कारण चर्चा में है. हिंदू पंचांग के अनुसार, यह पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है. इस साल प्रतिपदा तिथि 21 अक्टूबर 2025 को शाम 5:57 बजे शुरू होगी और 22 अक्टूबर को रात 8:18 बजे तक रहेगी. उदयातिथि के आधार पर, 22 अक्टूबर को गोवर्धन पूजा मनाना शुभ होगा. यह तिथि सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त के बाद तक प्रभावी रहेगी, जिससे 22 अक्टूबर को पूजा का सबसे उत्तम दिन माना जा रहा है.

गोवर्धन पूजा हिंदू धर्म में विशेष स्थान रखती है. यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण के उस अद्भुत कार्य को याद करता है, जब उन्होंने इंद्र के अहंकार को तोड़ने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठाया था. इस घटना से प्रेरित होकर, भक्त हर साल इस दिन गोवर्धन पर्वत और भगवान कृष्ण की पूजा करते हैं. यह त्योहार प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और मानवता के बीच गहरे रिश्ते को दर्शाता है. इस दिन पूजा, अनुष्ठान और दान-पुण्य करने की परंपरा है, जो भक्तों को शुभ फल प्रदान करती है.

पूजा की तैयारी और विधि  

गोवर्धन पूजा के दिन लोग सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं और घर को साफ-सुथरा रखते हैं. इसके बाद गोवर्धन पर्वत का प्रतीक बनाकर उसकी पूजा की जाती है. कई जगहों पर गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाई जाती है. भक्त भगवान कृष्ण को भोग लगाते हैं, जिसमें खीर, हलवा और अन्य पकवान शामिल होते हैं. पूजा में फूल, दीप, धूप और मिठाइयों का उपयोग होता है. इस दिन अन्नकूट की परंपरा भी निभाई जाती है, जिसमें विभिन्न प्रकार के व्यंजनों को भगवान को अर्पित किया जाता है.

क्यों खास है यह त्योहार?

 गोवर्धन पूजा केवल धार्मिक उत्सव ही नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का भी प्रतीक है. यह हमें प्रकृति के महत्व और उसकी रक्षा की जिम्मेदारी सिखाता है. भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को उठाकर प्रकृति और मानव के बीच संतुलन का संदेश दिया था. इस दिन लोग गायों की सेवा करते हैं और उन्हें भोजन कराते हैं, क्योंकि गायें हिंदू धर्म में पवित्र मानी जाती हैं. यह त्योहार सामाजिक एकता को भी बढ़ावा देता है, क्योंकि लोग एक साथ मिलकर पूजा और भोज का आयोजन करते हैं.

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