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Assembly Elections 2023: राजस्थान चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका, ज्योति मिर्धा और सवाई सिंह चौधरी ने थामा बीजेपी का दामन

Assembly Elections 2023: पूर्व कांग्रेस नेता ज्योति मिर्धा और सवाई सिंह चौधरी ने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है. दोनों नेता सोमवार को दिल्ली में राजस्थान बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी की मौजदूगी में शामिल हुए हैं. आपको बता दें कि इन दोनों नेताओं का जाट समुदाय में खूब दबदबा है ऐसे में […]

Calendar Last Updated : 11 September 2023, 05:56 PM IST
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Assembly Elections 2023: पूर्व कांग्रेस नेता ज्योति मिर्धा और सवाई सिंह चौधरी ने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है. दोनों नेता सोमवार को दिल्ली में राजस्थान बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी की मौजदूगी में शामिल हुए हैं. आपको बता दें कि इन दोनों नेताओं का जाट समुदाय में खूब दबदबा है ऐसे में उनका बीजेपी के साथ जुड़ना कांग्रेस के लिए बड़ा झटका है.

कांग्रेस को बड़ा झटका-

राजस्थान में इस साल के अंत तक विधानसभा का चुनाव होने वाला है. ऐसे में भाजपा अपनी पार्टी में शामिल करने के लिए बड़ी दाव पेंच खेल रही है. दिल्ली बीजेपी मुख्यालय पर राजस्थान बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी की मौजूदगी में नागौर संसदीय सीट से कांग्रेस का दल छोड़र सांसद ज्योति मिर्धा भाजपा में शामिल हो गई है. इनके अलावा सवाई सिंह चौधरी ने बी बीजेपी का हाथ थाम लिया है.

राजस्थान विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव के मद्देनजर से देखा जाए तो यह बड़ा सियासी घटनाक्रम है. ज्योति मिर्धा को राजस्थान के एक बड़े जाट चेहरे के रूप में देखा जाता है. ज्योति मिर्धा नागौर से कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ चुकी हैं. 2009 में मिर्धा के लिए सोनिया गांधी प्रचार भी कर चुकी हैं. वहीं, सवाई सिंह खींवसर से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं. वे रिटायर्ड आईपीएस (IPS) हैं.

बीजेपी को नागौर से मिला मजबूत चेहरा-

ज्योति मिर्धा नागौर से पूर्व कांग्रेस सांसद हैं. मिर्धा के बीजेपी में शामिल होने से बीजेपी को नागौर सीट पर मजबूत उम्मीदवार मिल गया है. बीजेपी उन्हें नागौर लोकसभा सीट से चुनाव में उतार सकती है. पिछले लोकसभा चुनाव में ज्योति मिर्धा कांग्रेस से लोकसभा उम्मीदवार थीं. वे NDA उम्मीदवार हनुमान बेनीवाल से हार गई थीं. हनुमान बेनीवाल बीजेपी के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़े थे. अब उनका बीजेपी से गठबंधन टूट चुका है, ऐसे में बीजेपी को नागौर से मजबूत चेहरे की तलाश थी.

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