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नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी इस बार भी लाल किले पर आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल नहीं हुए. एक तरफ जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले पर देश का तिरंगा फहराया. वहीं दूसरी ओर दोनों नेताओं की लगातार दूसरे साल गैरमौजूदगी ऐसे वक्त में हुई है, जब संसद में सरकार और विपक्ष के बीच तनातनी पहले से ज्यादा बढ़ती जा रही है.
बता दें, राहुल गांधी की सीट को लेकर 2024 में भी विवाद हुआ था. उस समय उन्हें लाल किले के कार्यक्रम में पहली पंक्ति की जगह दूसरी आखिरी पंक्ति में बैठाया गया था. कांग्रेस ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए इसे नेता प्रतिपक्ष के पद और प्रोटोकॉल के खिलाफ बताया था.
विवाद बढ़ने के बाद रक्षा मंत्रालय ने सफाई दी थी कि बैठने की व्यवस्था में बदलाव इसलिए किया गया था, ताकि पेरिस ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाड़ियों और पदक विजेताओं को प्रमुख स्थान दिया जा सके. हालांकि, विपक्ष का कहना था कि ऐसे आधिकारिक कार्यक्रमों में नेता प्रतिपक्ष को पहली पंक्ति में जगह मिलनी चाहिए.
इस बार खड़गे और राहुल गांधी के समारोह में नहीं पहुंचने की वजह से एक बार फिर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं. खासतौर पर इसलिए क्योंकि हाल ही में संसद का मानसून सत्र भी काफी हंगामेदार रहा था. कई मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली थी, जिसके बाद सदन की कार्यवाही भी प्रभावित हुई थी.
मानसून सत्र में कुल 12 विधेयक पारित किए गए. हालांकि, इनमें से केवल कागज लीक रोधी विधेयक पर ही विस्तार से चर्चा हो सकी. सत्र की शुरुआत भी छात्रों के संसद मार्च के बीच हुई थी, जिसके बाद राजनीतिक माहौल और गरमा गया. सत्र खत्म होने के बाद कांग्रेस ने तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की ओर से आयोजित पारंपरिक चाय पार्टी में भी हिस्सा नहीं लिया. ऐसे में स्वतंत्रता दिवस समारोह से खड़गे और राहुल गांधी की दूरी को सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बढ़ती राजनीतिक लड़ाई को विशेष तौर पर देखा जा रहा है.