नई दिल्ली: दिल्ली से मेरठ की दूरी अब सिर्फ समय का खेल रह जाएगी. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र को एक नई रफ्तार देने वाला 82 किलोमीटर लंबा नमो भारत रैपिड रेल कॉरिडोर पूरी तरह तैयार है और आज इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया जाएगा. इस हाई-स्पीड कॉरिडोर के शुरू होने से दिल्ली और मेरठ के बीच यात्रा महज 55 मिनट में पूरी हो सकेगी, जो क्षेत्रीय परिवहन के लिहाज से एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है.
सराय काले खान (दिल्ली) से मोदीपुरम (मेरठ) तक फैला यह कॉरिडोर 160 किमी प्रति घंटा की डिजाइन गति वाली ट्रेनों के साथ संचालित होगा. इसे नेशनल कैपिटल रिजन ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (एनसीआरटीसी) ने विकसित किया है और यह देश का पहला पूर्ण लंबाई में संचालित नमो भारत कॉरिडोर है.
दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ कॉरिडोर की आधारशिला 8 मार्च 2019 को रखी गई थी. कोरोना महामारी जैसी चुनौतियों के बावजूद निर्माण कार्य जारी रहा और अक्टूबर 2023 में साहिबाबाद से दुहाई डिपो तक 17 किलोमीटर का पहला खंड शुरू किया गया. इसके बाद मार्च 2024 में मोदीनगर उत्तर तक विस्तार हुआ और अगस्त 2024 में मेरठ दक्षिण तक सेवा बढ़ाई गई. जनवरी 2025 में न्यू अशोक नगर तक ट्रेनें पहुंचीं. अब अंतिम चरण के तहत सराय काले खान और मोदीपुरम तक पूरी लाइन चालू हो गई है.
करीब 70 किलोमीटर हिस्सा एलिवेटेड और 12 किलोमीटर भूमिगत है. लगभग 14 किलोमीटर ट्रैक दिल्ली में और 68 किलोमीटर उत्तर प्रदेश में स्थित है. दुहाई और मोदीपुरम में दो डिपो बनाए गए हैं. इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब ₹30,274 करोड़ है, जिसमें केंद्र और राज्य सरकारों के साथ एशियाई विकास बैंक व अन्य बहुपक्षीय संस्थानों का सहयोग शामिल है.
कॉरिडोर पर 16 स्टेशन विकसित किए गए हैं, जहां प्लेटफॉर्म स्क्रीन डोर, सीसीटीवी, अग्नि सुरक्षा और प्रीमियम कोच जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं. स्टेशनों को मेट्रो, रेलवे और बस सेवाओं से जोड़ा गया है. क्यूआर टिकटिंग और नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड के जरिए यात्रियों को एकीकृत भुगतान सुविधा मिलेगी.
यह लाइन प्रस्तावित एनसीआर क्षेत्रीय तीव्र पारगमन प्रणाली का पहला चरण है. भविष्य में दिल्ली-अलवर और दिल्ली-पानीपत जैसे कॉरिडोर भी विकसित किए जाने की योजना है. अधिकारियों के अनुसार, यह परियोजना उत्तरी भारत में क्षेत्रीय परिवहन के नए युग की शुरुआत है.