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सुनेत्रा पवार डिप्टी CM? एनसीपी का बड़ा दांव! सत्ता हथियाने से रोकने के लिए तुरंत फैसला, पवार फैमिली में हलचल

अजित पवार की मौत के बाद आज उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री नियुक्त किया जा सकता है. यह फैसला आनन फानन में लिया जा सकता है.

Calendar Last Updated : 31 January 2026, 09:10 AM IST
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मुंबई: महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम के निधन के बाद अब महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल मच गई है. क्योंकि अब सवाल यह था कि अजित पवार की मौक के बाद आखिर किसे उनकी गद्दी मिलेगी. लेकिन अब इसका फैसला हो चुका है. अब रिपोर्ट्स आ रही है कि पति के निधन के कुछ दिनों बाद ही सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री नियुक्त करने का निर्णय लिया जा रहा है.

हालांकि सवाल यह उठ रहा है कि आखिर यह फैसला इतना जल्दी लेने की क्या आवश्यकता थी. बता दें  यह निर्णय एनसीपी के वरिष्ठ नेताओं द्वारा लिया गया और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को सूचित किया गया, जिन्होंने इसे मंजूरी दे दी है. 

क्यों हो रहा आनन फानन में उपमुख्यमंत्री का चुनाव 

अजित पवार के निधन के महज कुछ दिनों बाद ही उनके रिक्त पद को भरने को लेकर चर्चाएंगे शुरु हो चुकी हैं. तो कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अजित पवार की अनुपस्थिति से उत्पन्न होने वाले किसी भी राजनीतिक विवाद को रोकने के लिए एनसीपी और भाजपा जल्द से जल्द पद पर नियुक्ति चाहती हैं.

यह नियुक्ति एनसीपी के दोनों गुटों के विलय की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही होनी है, क्योंकि इस प्रक्रिया के दौरान पार्टी को शरद पवार गुट की मांगों का भी सामना करना पड़ सकता है. गठबंधन की चर्चा काफी समय से चल रही है और स्थानीय निकायों के कुछ चुनावों में दोनों गुटों के गठबंधन करने के बाद बातचीत में तेजी आई है.

आज सुनेत्रा पवार बन सकती हैं मुख्यमंत्री 

सूत्रों के हवाले से यह खबर आ रही है कि आज अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार को महाराष्ट्र का उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है. हालांकि अभी तक इसकी आधिकारिक सूचना नहीं मिली है. भलें ही उन्हें मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है, लेकिन मंत्रिमंडल में फेरबदल होने तक उन्हें कोई विभाग नहीं दिया जा सकेगा.

राज्य विधानसभा में निर्वाचित होने के लिए शपथ ग्रहण के दिन से उनके पास छह महीने का समय होगा. हालांकि, संभावना है कि अजित पवार के पास रहा वित्त मंत्रालय फडणवीस के पास ही रहेगा, जो इस वर्ष का बजट पेश करेंगे.

सत्ता फिसलने का है डर

दरअसल एक सूत्र ने अंतरिम राजनीति का खुलासा करते हुए कहा कि यह फैसला आनन फानन में इस लिए जा रहा है ताकि सत्ता एनसीपी और भाजपा के हाथ से फिसल न जाए. इस कारण ही मुख्यमंत्री उपसभापति और एनसीपी विधायक दल के नेताओं के पदों को जल्द से जल्द भरने की कोशिश की जा रही है. क्योंकि अगर गठबंधन होता है और पद खाली होते हैं तो नए विधायक भी पद में हिस्सेदारी पेश करेंगे. 

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