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"घर ले जाएं, सड़कों पर आतंक क्यों?" सुप्रीम कोर्ट की आवारा कुत्तों के आतंक पर डॉग लवर्स और राज्य को चेतावनी

गली-मोहल्लों में आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों और उनसे होने वाली मौतों पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपना लिया है.

Calendar Last Updated : 13 January 2026, 04:36 PM IST
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नई दिल्ली: गली-मोहल्लों में आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों और उनसे होने वाली मौतों पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपना लिया है. मंगलवार को एक अहम सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने साफ कर दिया कि अब आवारा कुत्तों द्वारा किए गए हमलों की जिम्मेदारी केवल प्रशासन की नहीं होगी, बल्कि उन लोगों को भी जवाबदेह बनाया जाएगा जो उन्हें खाना खिलाते हैं.

घर ले जाएं, सड़कों पर आतंक क्यों?

जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एनवी अंजारिया की तीन जजों की बेंच ने उन लोगों पर तीखी टिप्पणी की जो सार्वजनिक स्थानों पर कुत्तों को खाना खिलाते हैं. कोर्ट ने पूछा, "कुत्तों को काटने और पीछा करने के लिए खुलेआम घूमने की इजाजत क्यों दी जानी चाहिए. अगर आप उनसे प्यार करते हैं, तो उन्हें अपने घर ले जाएं और पालें."

अदालत का संकेत

अदालत ने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में हर हमले और मौत के लिए राज्यों पर भारी मुआवजा लगाया जाएगा. कोर्ट ने कहा कि कुत्ते के काटने का मानसिक और शारीरिक असर पीड़ित पर जीवन भर रहता है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

संगठनों की जिम्मेदारी पर सवाल

सुनवाई के दौरान एक दर्दनाक घटना का जिक्र करते हुए बेंच ने पूछा कि जब एक 9 साल के बच्चे को उन कुत्तों ने मार डाला जिन्हें एक विशेष संगठन खाना खिलाता है. कोर्ट का कहना है कि इसके लिए किसे जिम्मेदार ठहराया जाए. कोर्ट ने इशारा किया कि ऐसे संगठनों को हर्जाने के लिए जवाबदेह बनाना जरूरी है.

कुत्ते का मूड कौन पढ़ सकता है?

पिछली सुनवाई में वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने तर्क दिया था कि अगर जानवरों के साथ सहानुभूति रखी जाए, तो वे हमला नहीं करते. इस पर जस्टिस विक्रम नाथ ने कड़ा जवाब देते हुए कहा, "आप यह कैसे पहचानेंगे कि सुबह कौन सा कुत्ता किस मूड में है? यह सिर्फ काटने का नहीं, बल्कि सड़कों पर पैदा होने वाले डर का भी मामला है."

कोर्ट का पिछला सख्त निर्देश

गौरतलब है कि पिछले साल नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि स्कूलों, अस्पतालों, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशनों जैसे संवेदनशील इलाकों से आवारा कुत्तों को हटाया जाए. उन्हें स्टेरिलाइजेशन (नसबंदी) और वैक्सीनेशन के बाद सुरक्षित शेल्टर होम भेजा जाना चाहिए.

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