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Makar Sankranti 2024: आज देश भर में मनाया जा रहा मकर संक्राति का त्योहार, जानें क्या हैं इसकी मान्यताएं

Makar Sankranti 2024: आज देश में 15 जनवरी को मकर संक्रांति मनाई जा रही है. वैदिक ज्योतिष में जब सूर्यदेव अपने पुत्र शनिदेव की राशि मकर में प्रवेश करते हैं तब मकर संक्रांति का त्योहार मनाया जाता है.

Calendar Last Updated : 15 January 2024, 12:57 PM IST
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Makar Sankranti 2024: देशभर में आज मकर संक्राति का त्योहार मनाया जा रहा है. हिंदू धर्म में मकर संक्रांति का विशेष महत्व होता है. पौष माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी यानी 15 जनवरी को मकर संक्रांति मनाई जा रही है. मकर संक्रांति को खिचड़ी, पोंगल और उत्तरायण आदि नामों से भी जानते हैं.

मकर संक्राति पर दान का महत्व 

इस दिन सुबह उठकर स्नान करने के बाद दान करने का बहुत महत्व है. आज के दिन खिचड़ी, तिलकुट, तिल के लड्डू आदि खाते हैं. वहीं बिहार में दही-चूड़ा खाने का रिवाज है और एक-दूसरे को मकर संक्रांति की बधाई देते हैं. वैदिक ज्योतिष में जब सूर्यदेव अपने पुत्र शनिदेव की राशि मकर में प्रवेश करते हैं तब मकर संक्रांति का त्योहार मनाया जाता है. मकर संक्रांति पर गंगास्नान और दान का विशेष महत्व होता है.

मकर संक्रांति पर सूर्यदेव की पूजा अर्घ्य दें

मकर संक्राति के दिन सुबह उगते सुर्यद्व को अर्घ्य देने की मान्यता है. तांबे के लोटे में जल लेकर उसमें तिल, गुड़, लाल चंदन, लाल पुष्प, अक्षत आदि डालें और फिर 'ॐ सूर्याय नम:' और ऊं घृणि: सूर्याय नम:  मंत्र का जाप करते हुए सूर्य को अर्घ्य देना शुभ माना जाता है. 

उत्तरायण का महत्व

मकर संक्रांति को उत्तरायण भी कहा जाता है. शास्त्रों के अनुसार उत्तरायण देवताओं का दिन और दक्षिणायण देवताओं की रात होती है वैदिक काल में उत्तरायण को देवयान तथा दक्षिणायण को पितृयान कहा जाता था.

गंगा स्नान का महत्व

मकर संक्रांति के त्योहार पर गंगा स्नान का भी विशेष महत्व माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है और शुभ फलों की प्राप्ति होती है.

मकर संक्रांति पर्व मनाएं जाने के पीछे कई मान्यताएं है. हिंदू धर्म में कुल 12 संक्रांति होती है. जब सूर्यदेव गुरु की राशि धनु से निकलकर अपने पुत्र शनिदेव की राशि मकर में प्रवेश करते हैं तब मकर संक्रांति मनाई जाती है. जब मकर संक्रांति पर सूर्य अपने पुत्र शनि से मिलने और एक महीने तक उनके घर में निवास करते हैं तो पिता-पुत्र के बीच मतभेद दूर हो जाते हैं. इस कारण से मकर संक्राति मनाई जाती है.

वहीं, दूसरी कहानी मकर संक्रांति मनाने के पीछे राजा भागीरथ से जुड़ी है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार राजा भागीरथ के पुरखों को मोक्ष नहीं प्राप्त था. राजा भागीरथ की तपस्या से प्रसन्न होकर देवी गंगा मकर संक्रांति पर धरती पर प्रगट हुईं और राजा भागीरथ के पूर्वजों की अस्थियों को गंगाजल से स्पर्श करते हुए उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई. 

मकर संक्रांति पर क्या करना शुभ

मकर संक्रांति के दिन गंगा स्नान करना चाहिए. मकर संक्रांति के दिन सूर्यदेव को जल जरूर अर्पित करें. मकर संक्रांति के दिन तिल और गुड़ से बनी चीजों को दान और इसका सेवन करें. इस दिन खिचड़ी जरूर खानी चाहिए. मकर संक्रांति पर भगवान सूर्यदेव के साथ वेद-पुराण का पाठ करना शुभ. आज के गायों को चारा खिलाएं.

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