Courtesy: Instagram (manjeet__sukh_1313)
चंडीगढ़: पंजाब की जानी-मानी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर मंजीत कौर की चंडीगढ़ के पीजीआईएमईआर अस्पताल में उपचार के दौरान दर्दनाक मौत हो गई। करीब दो महीने पहले बदमाशों ने उनका अपहरण कर लिया था और मोरिंडा के पास एक जंगल में पेड़ से बांधकर आग के हवाले कर दिया था। 26 अगस्त को उन्होंने अस्पताल में अंतिम सांस ली। इस घटना के सामने आने के बाद पीड़िता की मां कांता देवी की शिकायत पर चंडीगढ़ पुलिस ने अपहरण और हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इस पूरे मामले ने पंजाब पुलिस की कार्यशैली और ढुलमुल रवैये पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
होश में आने पर भी नहीं लिया गया बयान
इस मामले में बताया जा रहा है कि इलाज के दौरान जब मंजीत कौर को होश आया, तो उन्होंने पुलिस के सामने अपना बयान दर्ज कराने की इच्छा जताई थी। पीजीआई पुलिस पोस्ट की ओर से भी खरड़ सदर पुलिस और जांच अधिकारी को इस बात की लिखित सूचना (डीडीआर) दी गई थी कि पीड़िता बयान देने की स्थिति में है।
इसके बावजूद जांच अधिकारी अस्पताल नहीं पहुंचे और करीब दो महीने तक पीड़िता जिंदगी और मौत के बीच झूलती रही, लेकिन पुलिस ने न तो बयान दर्ज किया और न ही कोई केस दर्ज किया।
अपहरण के बाद पेड़ से बांधकर लगाई गई थी आग
3 और 4 जुलाई की मध्य रात्रि मंजीत के दो परिचितों, शुभी और पिंडा ने उन्हें मिलने के बहाने चंडीगढ़ के सेक्टर 34 में बुलाया था। वहां पहुंचते ही दोनों आरोपियों ने मंजीत के साथ मारपीट की और जबरन एक गाड़ी में बैठाकर पंजाब के मोरिंडा इलाके के जंगल में ले गए। वहां आरोपियों ने बर्बरता की सारी हदें पार करते हुए उन्हें एक पेड़ से बांध दिया और आग लगा दी।
घटना को अंजाम देने के बाद दोनों आरोपी मौके से फरार हो गए। इसके बाद एक अन्य परिचित ने मौके पर पहुंचकर कंबल से आग बुझाई और मंजीत को गंभीर हालत में मोरिंडा के अस्पताल पहुंचाया। बाद में उन्हें मोहाली के मैक्स अस्पताल और फिर चंडीगढ़ पीजीआईएमईआर में भर्ती कराया गया।
मौत के बाद दर्ज हुई FIR
26 अगस्त को मंजीत की मौत के बाद जब पीजीआई पुलिस पोस्ट ने दोबारा खरड़ पुलिस को सूचना भेजी, तब जाकर जांच अधिकारी अस्पताल पहुंचे। इसके बाद पीड़िता की मां को चंडीगढ़ के सेक्टर 34 थाने ले जाया गया, जहां उनका बयान दर्ज कर बुधवार रात प्राथमिकी दर्ज की गई। गुरुवार को शव का पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया गया। पंजाब पुलिस ने लापरवाही के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि चूंकि मुख्य अपहरण चंडीगढ़ से हुआ था, इसलिए प्राथमिक कार्रवाई चंडीगढ़ पुलिस के अधिकार क्षेत्र में आती है। पंजाब पुलिस का दावा है कि उन्होंने पीड़िता के परिवार को एफआईआर दर्ज कराने में पूरी मदद की है।
चंडीगढ़ पुलिस ने तेज की जांच
अब चंडीगढ़ पुलिस ने मामले की तहकीकात शुरू कर दी है। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि मंजीत कौर उस रात सेक्टर 34 क्यों गई थीं, किस गाड़ी से उनका अपहरण किया गया और इस हमले के पीछे मुख्य वजह क्या थी। इसके लिए सेक्टर 34 के आसपास और टोल प्लाजा के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। साथ ही पुलिस यह भी जांच कर रही है कि मंजीत का इलाज करने वाले शुरुआती दो अस्पतालों ने पुलिस को मेडिको-लीगल केस (एमएलसी) की सूचना समय पर दी थी या नहीं।