menu-icon
The Bharatvarsh News

पंजाब की 3.4 लाख छात्राओं के लिए बड़ी पहल, स्कूलों में शुरू होगा पीरियड्स पाठ्यक्रम

पंजाब सरकार ने किशोरियों के स्वास्थ्य और शिक्षा को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली 3.4 लाख से अधिक छात्राओं के लिए मासिक धर्म स्वच्छता पाठ्यक्रम शुरू किया है. इस पहल के जरिए लड़कियों को पीरियड्स से जुड़ी सही जानकारी, आत्मविश्वास और जागरूकता प्रदान करने का लक्ष्य रखा गया है.

Calendar Last Updated : 04 June 2026, 02:04 PM IST
Share:

चंडीगढ़: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने किशोरियों के स्वास्थ्य, शिक्षा और आत्मविश्वास को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है. राज्य सरकार ने सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली किशोरावस्था की लड़कियों के लिए देश की सबसे बड़ी स्कूल-आधारित मासिक धर्म स्वास्थ्य शिक्षा पहलों में से एक की शुरुआत की है.

मासिक धर्म स्वच्छता दिवस (28 मई) के अवसर पर पंजाब सरकार ने राज्यभर के सरकारी हाई और सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में “मासिक धर्म स्वच्छता पाठ्यक्रम” को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की घोषणा की. इस कार्यक्रम के तहत 29 मई 2026 से कक्षाओं में विशेष सत्रों की शुरुआत कर दी गई है. इस पहल से राज्य के 3,600 से अधिक सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली छठी से दसवीं कक्षा की 3.4 लाख से ज्यादा छात्राओं को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है.

लड़कियों की शिक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता

यह पहल पंजाब सरकार के उस दृष्टिकोण को दर्शाती है, जिसके तहत सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली को अधिक आधुनिक, समावेशी और संवेदनशील बनाया जा रहा है. सरकार का उद्देश्य लड़कियों को स्वास्थ्य संबंधी सही जानकारी, आत्मविश्वास और सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराना है.

मासिक धर्म जैसे विषय पर बड़े स्तर पर शिक्षा उपलब्ध कराकर सरकार उन सामाजिक मिथकों, झिझक और गलत धारणाओं को दूर करने का प्रयास कर रही है, जो लंबे समय से इस विषय से जुड़ी रही हैं.

शिक्षा और समानता से जुड़ा है मासिक धर्म स्वास्थ्य

अधिकारियों के अनुसार, इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मासिक धर्म किसी भी छात्रा की शिक्षा, आत्मविश्वास, सहभागिता या स्कूल जीवन में बाधा न बने.

उन्होंने बताया कि यह पहल भारत के सर्वोच्च न्यायालय की उन टिप्पणियों के अनुरूप है, जिनमें मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता को किशोरियों की गरिमा, शिक्षा और समान अवसरों से सीधे तौर पर जुड़ा माना गया है.

वॉश यूनाइटेड के सहयोग से तैयार हुआ पाठ्यक्रम

भगवंत मान सरकार ने यह कार्यक्रम मासिक धर्म स्वास्थ्य शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत अंतरराष्ट्रीय गैर-लाभकारी संस्था वॉश यूनाइटेड के सहयोग से शुरू किया है.

इसके तहत “मेनस्ट्रुअल हाइजीन मैनेजमेंट” नामक एक विशेष पाठ्यक्रम तैयार किया गया है, जिसे पंजाबी भाषा में विकसित किया गया है ताकि छात्राएं इसे आसानी से समझ सकें.

रूबी की कहानी के जरिए दी जा रही जानकारी

पाठ्यक्रम में 10 वर्षीय बच्ची रूबी को मुख्य पात्र बनाकर कहानी आधारित शिक्षण पद्धति अपनाई गई है. इसके साथ ही कक्षाओं में संवाद, चर्चा और सहभागिता आधारित गतिविधियां भी शामिल की गई हैं.

इन सत्रों का उद्देश्य छात्राओं को मासिक धर्म और शारीरिक परिवर्तनों की समझ देना, स्वच्छता संबंधी आदतों के बारे में जागरूक करना, आत्मविश्वास बढ़ाना और स्कूलों में सहयोगी वातावरण तैयार करना है.

7,200 शिक्षकों को दिया गया विशेष प्रशिक्षण

राज्यभर में कार्यक्रम के प्रभावी संचालन के लिए लगभग 7,200 शिक्षकों को पहले ही प्रशिक्षित किया जा चुका है.

यह कार्यक्रम तीन-सत्रीय मॉडल पर आधारित है, जिसमें आयु-उपयुक्त जानकारी और कहानी आधारित शिक्षण को शामिल किया गया है. इसके लिए लगभग 100 स्टेट रिसोर्स पर्सन्स को मास्टर ट्रेनर के रूप में तैयार किया गया, जिन्होंने आगे जिला स्तर पर शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया.

अधिकारियों का कहना है कि प्रशिक्षित शिक्षक कक्षाओं में ऐसा सुरक्षित वातावरण तैयार करेंगे, जहां छात्राएं बिना किसी झिझक के सवाल पूछ सकेंगी और सही जानकारी प्राप्त कर सकेंगी.

पायलट प्रोजेक्ट के सकारात्मक परिणाम

राज्यभर में कार्यक्रम लागू करने से पहले इसे पंजाब के सभी 23 जिलों के 100 से अधिक सरकारी स्कूलों में पायलट आधार पर चलाया गया था. इस पायलट परियोजना में 45,000 से अधिक छात्रों ने भाग लिया.

सरकार द्वारा साझा आंकड़ों के अनुसार:

97 प्रतिशत शिक्षकों ने कहा कि वे नए पाठ्यक्रम के माध्यम से मासिक धर्म शिक्षा देने में सहज महसूस करते हैं.
94 प्रतिशत शिक्षकों ने कार्यक्रम को पूरे राज्य में लागू करने की सिफारिश की.
88 प्रतिशत शिक्षकों ने इसे पहले की शिक्षण पद्धतियों की तुलना में अधिक प्रभावी और सरल बताया.
80 प्रतिशत शिक्षकों ने कक्षा सत्रों में छात्राओं की सक्रिय भागीदारी दर्ज की.

शिक्षकों ने साझा किए अनुभव

फरीदकोट की अध्यापिका जसप्रीत कौर ने कहा, “माहवारी के दौरान स्वच्छता संबंधी यह पाठ्यक्रम लड़कियों के लिए सवाल पूछने और अपने अनुभव साझा करने हेतु एक सुरक्षित वातावरण तैयार करता है, जिससे माहवारी से जुड़े मिथकों को प्रभावी ढंग से दूर किया जा सकता है. कहानियों, खेलों और दृश्य सामग्री के माध्यम से अपनाई गई इंटरैक्टिव पद्धति सीखने की प्रक्रिया को अधिक सहज और आत्मीय बनाती है तथा डर और झिझक की भावना को कम करती है. यह निश्चित रूप से आत्मसम्मान और सहभागिता बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है.”

अमृतसर की अध्यापिका मोनिका सूद ने कहा कि छात्राओं ने सत्रों में उत्साह के साथ भाग लिया और खुलकर अपने अनुभव साझा किए. उन्होंने बताया कि सही जानकारी किशोरियों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से बचाने और अपने शरीर को बेहतर ढंग से समझने में मदद करती है.

मोगा की अध्यापिका सिल्वी ने कहा कि इस कार्यक्रम के बाद न केवल छात्राएं बल्कि शिक्षक भी इस विषय पर पहले से अधिक सहजता और आत्मविश्वास के साथ चर्चा करने लगे हैं.

छात्राओं ने भी जताई खुशी

संगरूर की नौवीं कक्षा की छात्रा कोमल प्रीत कौर ने कहा कि इन सत्रों से उसका आत्मविश्वास बढ़ा है और उसे यह समझने में मदद मिली कि माहवारी एक सामान्य जैविक प्रक्रिया है, कोई बीमारी नहीं.

मोगा की छात्रा डिंपल रानी ने बताया कि उसे यह सत्र बेहद रोचक लगे और उसने घर जाकर अपनी मां के साथ भी इस बारे में चर्चा की.

दसवीं कक्षा की छात्रा तनीशा ने कहा कि इस पाठ्यक्रम ने लड़कियों को बिना शर्म और झिझक के खुलकर बात करने का अवसर दिया है.

संवेदनशील और प्रगतिशील शिक्षा व्यवस्था की ओर कदम

अधिकारियों का कहना है कि यह पहल केवल मासिक धर्म स्वास्थ्य जागरूकता तक सीमित नहीं है, बल्कि किशोरियों के लिए अधिक संवेदनशील, प्रगतिशील और सहयोगी शिक्षा प्रणाली विकसित करने का प्रयास भी है.

सरकारी स्कूलों में इस विषय को संस्थागत रूप देने के माध्यम से पंजाब सरकार छात्राओं के स्वास्थ्य, शिक्षा में उनकी भागीदारी और समग्र विकास को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रही है.

शिक्षा सुधारों का हिस्सा है यह पहल

यह कार्यक्रम मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में चलाए जा रहे व्यापक शिक्षा सुधार अभियान का हिस्सा माना जा रहा है. सरकार पहले से ही सरकारी स्कूलों में बुनियादी ढांचे के विकास, शिक्षक प्रशिक्षण, छात्र कल्याण और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दे रही है.

सम्बंधित खबर

Recent News