नई दिल्ली: टी20 विश्व कप से बाहर होने के बाद बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) लगातार विवादों के घेरे में बना हुआ है. सुरक्षा कारणों का हवाला देकर भारत से बाहर होने के बाद से बांग्लादेश क्रिकेट की पूरे विश्व में आलोचना हो रही है. अब एक और फैसले ने क्रिकेट जगत में हलचल मचा दी है. हालिया घटनाक्रम ने यह संकेत दे दिया है कि बीसीबी के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने बीसीबी के इनकार के बाद शनिवार को बांग्लादेश को टी20 विश्व कप से आधिकारिक रूप से बाहर कर दिया और उसकी जगह स्कॉटलैंड को टूर्नामेंट में शामिल कर लिया. इस फैसले के कुछ ही दिनों बाद बीसीबी ने एक ऐसा कदम उठाया, जिसने खिलाड़ियों और क्रिकेट प्रशंसकों दोनों को हैरान कर दिया. बोर्ड ने विवादित निदेशक एम. नजमुल इस्लाम को जिम्मेदारियों से हटाने के बाद दोबारा एक अहम पद सौंप दिया.
बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड इन दिनों विवादों से घिरा हुआ है. अब बीसीबी के एक फैसले के कारण बोर्ड एक बार फिर से चर्चा में आ गया है. दरअसल बीसीबी ने एम. नजमुल इस्लाम को सभी जिम्मेदारियों से मुक्त करने के कुछ ही दिनों बाद उन्हें वित्त विभाग का प्रमुख नियुक्त कर दिया. इस फैसला के सामने आते ही राष्ट्रीय टीम के खिलाड़ियों में नाराजगी फैल गई. कई खिलाड़ियों ने बोर्ड के इस कदम को असंवेदनशील और गलत बताया.
बता दें 18 जनवरी को नजमुल इस्लाम की टिप्पणियों के खिलाफ खुला विरोध दर्ज किया था. खिलाड़ियों के विद्रोह के बाद बीसीबी को मजबूरन उन्हें उनके पद से हटाना पड़ा था. उस समय बोर्ड ने उन्हें कारण बताओ नोटिस भी जारी किया था.
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह पूरा विवाद एक बयान से शुरु हुआ था. जिसमें नजमुल ने कहा था कि यदि बांग्लादेश टी20 विश्व कप से हटता है तो खिलाड़ियों को किसी भी तरह का मुआवजा नहीं दिया जाएगा. उन्होंने यह तर्क दिया था कि खिलाड़ी अब तक आईसीसी का कोई भी टूर्नामेंट जीतने में सफल नहीं रहे हैं.
इस टिप्पणी ने खिलाड़ियों और क्रिकेट समुदाय में भारी आक्रोश पैदा कर दिया. इसके बाद से ही उन्हें लेकर खिलाड़ियों के मन में आक्रोश था. यह पहली बार नहीं था जब नजमुल इस्लाम ने कोई विवादित बनया दिया है. इससे पहले उन्होंने पूर्व कप्तान तमीम इकबाल को 'भारत का एजेंट' कह दिया था.