Courtesy: ANI
पटना: बिहार की राजनीति में एक बड़ा ऐतिहासिक बदलाव होने वाला है. लगभग दो दशकों तक सत्ता संभालने के बाद नीतीश कुमार ने मंगलवार को अपने मंत्रिमंडल को भंग कर दिया और राज्यपाल को इस्तीफा सौंप दिया. इस कदम के साथ ही राज्य में नेतृत्व परिवर्तन का रास्ता साफ हो गया है, जहां पहली बार भारतीय जनता पार्टी सरकार का नेतृत्व करती नजर आ सकती है.
यह घटनाक्रम पटना में हुई अंतिम कैबिनेट बैठक के बाद सामने आया. बैठक में नीतीश कुमार ने अपने मंत्रियों को फैसले की जानकारी दी. इसके बाद उन्होंने राज्यपाल सैयद अता हसनैन से मुलाकात कर अपना इस्तीफा सौंपा. बताया जा रहा है कि बैठक का माहौल काफी भावुक था.
बैठक के दौरान कई मंत्री भावुक हो गए. राज्य मंत्री राम कृपाल यादव ने इसे एक ऐतिहासिक और संवेदनशील पल बताया. नीतीश कुमार ने अपने सहयोगियों को निर्णय के पीछे की परिस्थितियों से अवगत कराया.
राज्य मंत्री राम कृपाल यादव ने बताया कि, 'मुख्यमंत्री ने हमें मंत्रिमंडल भंग करने के अपने निर्णय के बारे में सूचित किया. वे आज बाद में राज्यपाल को मुख्यमंत्री पद से अपना इस्तीफा सौंपेंगे.'
निःशब्द हूँ.....
— Nitish Jha (@jhanitish134) April 14, 2026
"मुख्यमंत्री आदरणीय श्री @NitishKumar जी आपका दो दशकों (लगभग 20 वर्षों) का सफर बिहार में विकास, सुशासन और सामाजिक परिवर्तन का प्रतीक रहा है। इस दौरान, ठहराव से निकलकर राज्य ने रोजगार, अवसंरचना और कानून-व्यवस्था में सुधार देखा है। pic.twitter.com/NBsWb5fBeN
अब भाजपा विधायक दल की बैठक बुलाकर नए नेता का चुनाव करेगी. 243 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है और एनडीए के तहत सरकार बनाने की स्थिति में है.
एनडीए की बैठक में विधायक दल के नेता के नाम को अंतिम मंजूरी दी जाएगी. इसके बाद नए मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण की प्रक्रिया शुरू होगी.
जेडीयू नेताओं ने नीतीश कुमार के कार्यकाल को ऐतिहासिक बताया. पार्टी के अनुसार, उनके नेतृत्व में बिहार की छवि में बड़ा बदलाव आया और राज्य को नई पहचान मिली.
इस इस्तीफे के साथ बिहार में एक लंबे राजनीतिक दौर का समापन हो गया है. हालांकि गठबंधन बना रहेगा, लेकिन नेतृत्व में बदलाव राज्य की राजनीति में नई दिशा तय करेगा.