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उत्तर प्रदेश विधानसभा से 'बांके बिहारी मंदिर ट्रस्ट विधेयक' पारित, जानें आगे क्या होगा?

यूपी विधानसभा में आज सुबह लगभग 11 बजे 'विकसित भारत, विकसित उत्तर प्रदेश' विज़न 2047 पर 24 घंटे की चर्चा शुरू हुई. जिसमें 'बांके बिहारी मंदिर ट्रस्ट विधेयक' को मंजूरी दे दी गई है.

Calendar Last Updated : 13 August 2025, 05:24 PM IST
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Banke Bihari Temple Trust Bill: उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में 'बांके बिहारी मंदिर ट्रस्ट विधेयक' को मंजूरी मिल गई. यह विधेयक मथुरा के ऐतिहासिक बांके बिहारी मंदिर के प्रबंधन को मजबूत करेगा. इसका लक्ष्य मंदिर की परंपराओं को संरक्षित करते हुए श्रद्धालुओं को विश्वस्तरीय सुविधाएं देना है. 

यूपी विधानसभा में आज यानी बुधवार को विकसित भारत, विकसित उत्तर प्रदेश' विज़न 2047 पर 24 घंटे की चर्चा शुरू हुई. इस दौरान सरकार ने अपनी योजनाएं पेश की, वहीं विपक्ष ने भी जमकर सवाल उठाया हालांकि इसी बीच बांके बिहारी मंदिर ट्रस्ट विधेयक को ध्वनि मत से पारित कर दिया गया.

ट्रस्ट का मुख्य उद्देश्य

'बांके बिहारी मंदिर ट्रस्ट विधेयक' मंदिर के प्रबंधन को व्यवस्थित करने के लिए बनाया गया है. यह स्वामी हरिदास की परंपराओं को संरक्षित रखेगा. ट्रस्ट मंदिर के सभी चढ़ावे, दान और संपत्तियों का प्रबंधन करेगा. इसमें मूर्तियां, आभूषण, मौद्रिक दान और अन्य संपत्तियां शामिल हैं. ट्रस्ट का मुख्य उद्देश्य मंदिर की पवित्रता बनाए रखना और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं बढ़ाना है. श्रद्धालुओं के लिए नई सुविधाएं शुरू की जाएगी. जिसमें प्रसाद वितरण की व्यवस्था, वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगों के लिए अलग दर्शन मार्ग, पेयजल, कतार प्रबंधन कियोस्क, गौशालाएं, सामुदायिक भोजन कक्ष, बड़े रसोईघर, होटल, गेस्टहाउस, प्रदर्शनी हॉल और प्रतीक्षालय शामिल है. ये सुविधाएं श्रद्धालुओं के अनुभव को बेहतर बनाएंगी. साथ ही, मंदिर का प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था भी मजबूत होगी. ट्रस्ट में 11 मनोनीत और 7 पदेन सदस्य होंगे. 

नहीं बदले जाएंगे स्वामी हरिदास की परंपराएं

ट्रस्ट हर तीन महीने में बैठक करेगा. यह दर्शन का समय तय करेगा और पुजारियों की नियुक्ति करेगा. ट्रस्ट 20 लाख रुपये तक की संपत्ति बिना अनुमोदन के खरीद सकता है. बड़े लेनदेन के लिए सरकार की मंजूरी जरूरी होगी. ट्रस्ट का नेतृत्व एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) करेगा, जो एडीएम रैंक का अधिकारी होगा. सरकार ने कहा कि यह विधेयक मंदिर की आध्यात्मिक विरासत को बनाए रखेगा. स्वामी हरिदास की परंपराएं अपरिवर्तित रहेंगी. सभी त्योहार और अनुष्ठान पहले की तरह होंगे. यह ट्रस्ट मंदिर प्रबंधन को पारदर्शी और प्रभावी बनाएगा.

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