नई दिल्लीः वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को बजट पेश किया. इस बजट में उन्होंने बड़ा संकेत दिया. केंद्र सरकार ने 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों को मान लिया है. इस बजट में मुख्य रूप से दो मुद्दों पर ध्यान दिया गया. पहला केंद्र सरकार के कर्मचारियों से संबंधित 8वां वेतन आयोग. दूसरा 16वां वित्त आयोग जो राज्यों के हिस्सेदारी तय करता है. एक तरफ केंद्र सरकार ने राज्यों को बड़ी राहत दी है. वहीं केंद्र सरकार के कर्मचारियों को अपनी सैलरी में बढ़ोतरी के लिए और इंतजार करना होगा.
अपने बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों को मान लिया है. इसके तहत राज्यों को केंद्रीय टैक्स में 41 प्रतिशत हिस्सा देने का फैसला किया गया है. यह व्यवस्था 1 अप्रैल से लागू होगी और अगले 5 सालों तक प्रभावी रहेगी. 16वें वित्त आयोग का गठन 31 दिसंबर, 2023 को किया गया था. आयोग ने 17 नवंबर को अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति को सौंपी थी.
बजट 2026-27 में राज्यों के लिए 1.4 लाख करोड़ रुपए के अनुदान की घोषणा की गई है. यह पैसा मुख्य रूप से गांवों और शहरों में स्थानीय सरकारों को मजबूत करने और प्राकृतिक आपदाओं की तैयारी पर खर्च किया जाएगा. इस फैसले से यह सुनिश्चित होगा कि राज्यों को सड़कों, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे विकास कार्यों के लिए फंड की कमी का सामना न करना पड़े. साथ ही इससे विकास योजनाओं में तेजी आएगी.
हालांकि, बजट में केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग के संबंध में कोई खास तारीख तय नहीं की गई है. यह ध्यान देने वाली बात है कि 7वें वेतन आयोग का काम दिसंबर 2025 में पूरा हो गया था. नियमों के अनुसार, 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों को 1 जनवरी 2026 से लागू किया जाना चाहिए था, लेकिन अब तक इसके लागू होने के बारे में कोई जानकारी सामने नहीं आई है. सरकार आयोग की विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार कर रही है, इसलिए कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को अच्छी खबर के लिए थोड़ा और इंतजार करना होगा.