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नई दिल्ली: संगीत जगत की महान हस्ती आशा भोसले का निधन 12 अप्रैल को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में हुआ था. उनके बेटे आनंद भोसले ने 13 अप्रैल को उनका अंतिम संस्कार किया.
एक सप्ताह बाद, आज यानी कि 20 अप्रैल को दिग्गज गायिका के बेटे आनंद भोसले और उनकी पोती जनाई भोसले ने आज वाराणसी में उनकी अस्थियों का विसर्जन किया. इस दौरान माहौल बेहद भावुक रहा और परिवार के सदस्य अपनी भावनाएं छिपा नहीं सके.
वाराणसी में गंगा नदी के तट पर परिवार ने पूरे विधि-विधान के साथ यह रस्म निभाई. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ये आशा भोसले की इच्छा थी कि उनकी अस्थियां बनारस में विसर्जित की जाए. जिस कारण उनके बेटे और पोती ने वाराणसी में अंतिम संस्कार संपन्न किया गया. पूजा के दौरान उनकी पोती जनाई भोसले भावुक हो गईं और अपने आंसू नहीं रोक सकीं.
आशा भोसले की पोती जनाई भोसले अपनी दादी से बहुत ज्यादा अटैच थीं. जिस कारण उनका जाना वह बर्दाश्त नहीं कर पा रही हैं. गायिका के निधन के बाद ज़नाई भोसले ने सोशल मीडिया पर एक दिल छू लेने वाला संदेश साझा किया. उन्होंने अपनी दादी को अपनी सबसे करीबी दोस्त और जीवन का अहम हिस्सा बताया.
उन्होंने याद किया कि कैसे हर दिन की छोटी-छोटी बातें, जैसे साथ में चाय पीना या हंसी-मजाक करना, अब सिर्फ यादें बनकर रह गई हैं. उनके शब्दों में गहरा दर्द और अपनापन झलकता है.
पिछले कुछ महीनों से आशा भोसले की तबीयत ठीक नहीं चल रही थी. सीने में इंफेक्शन और कमजोरी के चलते उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उपचार के दौरान उनका निधन हो गया. मुंबई के शिवाजी पार्क श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया गया.
आशा भोसले सिर्फ एक गायिका नहीं थीं, बल्कि भारतीय संगीत की पहचान भी थीं. उनकी आवाज और उनके गाए गीत हमेशा लोगों के दिलों में जिंदा रहेंगे. उनके जाने से जो खालीपन पैदा हुआ है, उसे भर पाना किसी के लिए भी आसान नहीं होगा, लेकिन उनकी विरासत हमेशा नए गायकों को प्रेरणा देती रहेगी.