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नई दिल्ली: अक्षय कुमार के फैंस और कॉमेडी फिल्मों के शौकीनों का इंतजार खत्म हो गया है. मशहूर 'वेलकम' फ्रेंचाइजी की तीसरी कड़ी 'वेलकम टू द जंगल' आखिरकार 26 जून को सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है. अहमद खान के निर्देशन में बनी इस मल्टी-स्टारर फिल्म में अक्षय कुमार, रवीना टंडन, दिशा पाटनी, सुनील शेट्टी, परेश रावल और जैकी श्रॉफ समेत करीब 34 दिग्गज कलाकार एक साथ स्क्रीन पर कॉमेडी का तड़का लगाते नजर आ रहे हैं. फिल्म की मूल कहानी दिवंगत लेखक नीरज वोरा ने लिखी है. अगर आप इस वीकेंड सिनेमाघरों का रुख करने की सोच रहे हैं, तो आइए जानते हैं कि भारी-भरकम स्टारकास्ट से सजी यह फिल्म उम्मीदों पर कितनी खरी उतरी है.
कहानी की शुरुआत टैक्स चोरी के एक शातिर पैंतरे से होती है. जहां टैक्स बचाने के लिए जानबूझकर एक फ्लॉप फिल्म बनाने की योजना तैयार की जाती है. इस फ्लॉप फिल्म के लिए किसी बड़े 'धुरंधर' अभिनेता के बजाय एक 'दरिंदर' (फ्लॉप) एक्टर की तलाश शुरू होती है. दिलचस्प मोड़ तब आता है जब इस प्रोजेक्ट को बनाने की जिम्मेदारी देवदास (राजपाल यादव) और परेश रावल को सौंपी जाती है. महज 20 हजार रुपये के बजट में काम करने वाले देवदास के हाथ अचानक 2000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट लग जाता है.
इस काल्पनिक फ्लॉप फिल्म के हीरो बनते हैं अक्षय कुमार. जो असल जिंदगी में एक नाकाम अभिनेता हैं और मजबूरी में भोजपुरी सिनेमा में आइटम सॉन्ग करने को मजबूर हैं. कहानी में मजनू भाई के भाई 'रोमियो' (अरशद वारसी) और उदय भाई के भाई 'येड़ा अन्ना' (सुनील शेट्टी) की एंट्री होती है. जो स्क्रीन पर जबरदस्त हंगामा खड़ा करते हैं. इसके साथ ही अक्षय कुमार के पिता की वापसी की एक दिलचस्प बैकस्टोरी और राजपाल यादव के कर्ज में डूबे होने का मजेदार एंगल भी दिखाया गया है. फिल्म के एक हिस्से में कलाकारों की आर्मी ट्रेनिंग होती है, जो दर्शकों को लोटपोट होने पर मजबूर कर देती है. कुछ ऐसी परिस्थितियां बनती हैं कि पूरी फिल्म को महज एक दिन के भीतर ही शूट करना पड़ता है.
फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष इसकी स्टारकास्ट की कॉमिक टाइमिंग और अक्षय कुमार की लाजवाब एक्टिंग है. पूरी फिल्म में ज्यादा दिमाग लगाने की आवश्यकता नहीं है, यह शुद्ध रूप से मनोरंजन के उद्देश्य से बनाई गई है. इंटरवल के ठीक पहले सिंगर तलविंदर का एक बेहतरीन गाना आता है, जो फिल्म की रफ्तार को बनाए रखता है. इसके अलावा वरिष्ठ कलाकार किरण कुमार और फरीदा जलाल ने भी अपने किरदारों से प्रभावित किया है. अहमद खान का कोरियोग्राफी बैकग्राउंड फिल्म के गानों में साफ झलकता है. सभी गानों को काफी भव्य पैमाने पर शूट किया गया है, जो पर्दे पर बेहद खूबसूरत लगते हैं. फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर इसकी तेज रफ्तार कहानी को पूरी तरह सपोर्ट करता है.
तमाम खूबियों के बावजूद फिल्म में कुछ कमियां भी नजर आती हैं. फिल्म का रनटाइम 2 घंटे 43 मिनट का है, जो कई जगहों पर काफी लंबा और खिंचा हुआ महसूस होता है. खासकर फिल्म के फर्स्ट हाफ में जरूरत से ज्यादा गानों का होना और एक के बाद एक कई किरदारों की एंट्री होने से मुख्य कहानी की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ जाती है. इसके अलावा, जो दर्शक सिनेमा में गहरा लॉजिक, यथार्थवाद या रियलिस्टिक कंटेंट देखना पसंद करते हैं, उन्हें इसके कुछ सीन्स काफी लाउड, अवास्तविक और बचकाने लग सकते हैं. कुल मिलाकर, 'वेलकम टू द जंगल' एक ऐसी कमर्शियल लाफ्टर राइड है, जिसे आप अपने थिएटर में दिमाग घर पर छोड़कर सिर्फ मनोरंजन के लिए देख सकते हैं.