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Diabetes के मरीजों के लिए वरदान बनी यह सर्जरी, एम्स ने 35 लोगों को दी नई जिंदगी

भारत दुनिया की मधुमेह राजधानी बन चुका है. यहां करीब 7 करोड़ लोग इस बीमारी से जूझ रहे हैं. इनमें से लाखों ऐसे हैं जिनकी शुगर दवाओं और परहेज के बावजूद नियंत्रित नहीं होती.

Calendar Last Updated : 19 January 2026, 09:41 PM IST
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नई दिल्ली: भारत दुनिया की मधुमेह राजधानी बन चुका है. यहां करीब 7 करोड़ लोग इस बीमारी से जूझ रहे हैं. इनमें से लाखों ऐसे हैं जिनकी शुगर दवाओं और परहेज के बावजूद नियंत्रित नहीं होती. ऐसे मरीजों के लिए दिल्ली एम्स से एक बड़ी खुशखबरी आई है. निजी अस्पतालों में यह सर्जरी काफी महंगी है, लेकिन एम्स जैसे संस्थानों में यह किफायती दर पर उपलब्ध है.

15 महीने और 35 सर्जरी

एम्स के सर्जरी विभाग के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. मंजूनाथ ने बताया कि पिछले 15 महीनों में 35 ऐसे मरीजों की मेटाबोलिक सर्जरी की गई. इनकी शुगर दवाओं से काबू में नहीं आ रही थी. परिणाम हैरान करने वाले रहे. सर्जरी के पहले ही दिन से मरीजों का शुगर लेवल सामान्य हो गया और अधिकांश की दवाएं व इंसुलिन पूरी तरह छूट गई.

कैसे काम करती है यह सर्जरी?

डॉ. मंजूनाथ ने बताया कि यह कोई साधारण वजन घटाने वाली सर्जरी नहीं है, बल्कि एक जटिल मेटाबोलिक प्रक्रिया है. सर्जरी के जरिए पेट के आकार को कम किया जाता है. यह सर्जरी शरीर में भूख बढ़ाने वाले 'ग्राहलिन' हार्मोन को कम कर देती है. इससे इंक्रीटिन हार्मोन सक्रिय हो जाते हैं, जो शरीर में इंसुलिन के प्रबंधन को प्राकृतिक रूप से सुधारते हैं.

किडनी फेल्योर और हार्ट अटैक से बचाव

अनियंत्रित मधुमेह शरीर के अंगों को दीमक की तरह चाटती है. डॉ. मंजूनाथ के अनुसार, जिन मरीजों की शुगर दवाओं से कंट्रोल नहीं होती उनमें किडनी फेल्योर, अंधापन, स्ट्रोक और हार्ट अटैक का खतरा बहुत ज्यादा होता है.

किसे है इस सर्जरी की जरूरत?

विशेषज्ञों ने कुछ अहम मानक तय किए हैं. 18 से 65 साल के लोग यह सर्जरी करा सकते हैं. अगर आपका HbA1c स्तर 6.5 से ऊपर है और दवाओं से कम नहीं हो रहा, तो आप इसके पात्र हैं. जो लोग पिछले 20-25 सालों से इंसुलिन ले रहे हैं, उन पर यह सर्जरी कम कारगर हो सकती है.

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