नई दिल्ली: फिटनेस की दुनिया में हर एथलीट और जिम जाने वाला व्यक्ति अपने परफॉर्मेंस को अगले स्तर पर ले जाने के लिए बेहतर डाइट की तलाश में रहता है. अब आधुनिक विज्ञान ने एक प्राचीन जड़ी-बूटी, अश्वगंधा पर मुहर लगा दी है. न्यूट्रिएंट्स जर्नल सहित कई हालिया शोधों से पता चला है कि अश्वगंधा रूट एक्सट्रैक्ट एथलीटों के लिए न केवल सुरक्षित है, बल्कि प्रदर्शन को बढ़ाने में बेमिसाल है.
रॉकेट जैसी रिकवरी और मांसपेशियों की ताकत
पुणे और मुंबई में हुए शोध के अनुसार, 8 सप्ताह तक रोजाना 600 mg अश्वगंधा लेने से बेंच प्रेस और स्क्वैट जैसे व्यायामों में मांसपेशियों की ताकत और आकार में काफी वृद्धि देखी गई है. यह वर्कआउट के बाद होने वाली मांसपेशियों की क्षति को कम कर रिकवरी को तेज करता है.
कोर्टिसोल लेवल
44% की कमी तनाव हार्मोन कोर्टिसोल एथलीटों की प्रगति को रोकता है. हैदराबाद की एक स्टडी के अनुसार, अश्वगंधा के सेवन से तनाव के स्तर में 44% तक की कमी आई है. यह शरीर को गहन प्रशिक्षण के दौरान शांत और केंद्रित रखने में मदद करता है.
गजब का स्टेमिना और ऑक्सीजन क्षमता
एरोबिक क्षमता (VO2 max) में सुधार के लिए अश्वगंधा रामबाण है. यह शरीर द्वारा ऑक्सीजन के उपयोग को बेहतर बनाता है, जिससे थकान कम होती है और एथलीट लंबे समय तक बिना थके ट्रेनिंग कर सकते हैं.
बेहतर नींद
शरीर का नेचुरल रिचार्ज एक एथलीट के लिए ट्रेनिंग जितनी जरूरी है, उतनी ही नींद भी. अश्वगंधा नींद के हार्मोन को संतुलित करता है, जिससे गहरी और क्वालिटी वाली नींद आती है. बेहतर नींद का मतलब है कि अगले दिन के वर्कआउट के लिए पूरी तरह से तैयार शरीर.
वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर सामान्य गाइडलाइंस इस प्रकार हैं.
मात्रा: रोजाना 300 से 600 mg (दो खुराक में).
समय: वर्कआउट के बाद या रात को सोने से पहले.
रूप: कैप्सूल या रूट एक्सट्रैक्ट पाउडर सबसे प्रभावी माने जाते हैं.
प्राकृतिक होने के बावजूद, इसके कुछ साइड इफेक्ट्स जैसे पाचन में परेशानी या नींद आना हो सकते हैं. गर्भवती महिलाओं और थायराइड रोगियों को इसके सेवन से बचना चाहिए. किसी भी नए सप्लीमेंट को शुरू करने से पहले मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह जरूर लें.