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T20 World Cup: 39 साल बाद वानखेड़े में फिर इंग्लैंड से सेमीफाइनल! क्या भारत बदलेगा 1987 की हार का बदला?

5 मार्च 2026 को यहां भारत और इंग्लैंड के बीच टी20 वर्ल्ड कप का सेमीफाइनल खेला जाएगा, लेकिन इससे पहले भारत और इंग्लैंड आज से 39 साल पहले वानखेड़ेके मैदान पर सेमीफाइनल के लिए आमने-सामने थे.

Calendar Last Updated : 05 March 2026, 07:43 AM IST
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मुंबई: मुंबई का वानखेड़े स्टेडियम एक बार फिर इतिहास रचने को तैयार है. 5 मार्च 2026 को यहां भारत और इंग्लैंड के बीच टी20 वर्ल्ड कप का सेमीफाइनल खेला जाएगा, लेकिन इस मुकाबले की खासियत सिर्फ मौजूदा टूर्नामेंट तक सीमित नहीं है. बल्कि आज से ठीक 39 साल पहले इसी मैदान पर दोनों टीमें विश्व कप के सेमीफाइनल में आमने-सामने थीं. उस यादगार शाम की गूंज आज भी क्रिकेट प्रेमियों के दिलों में तरोताजा है.

1987 में खेले गए वनडे विश्व कप के सेमीफाइनल में भारत बतौर डिफेंडिंग चैंपियन मैदान में उतरा था. उससे चार साल पहले, 1983 में, कपिल देव की कप्तानी में भारत ने पहली बार विश्व कप जीतकर दुनिया को चौंका दिया था. वहीं हाल के वर्षों में, 2024 में रोहित शर्मा की अगुवाई में भारत ने टी20 विश्व कप अपने नाम किया. ऐसे में 2026 का सेमीफाइनल कई मायनों में अतीत की याद दिलाता है.

1987 मैच में ये स्टार खिलाड़ियों थे शामिल

1987 के उस सेमीफाइनल में दोनों टीमों के पास दिग्गज खिलाड़ियों की भरमार थी. जिसमें भारत की ओर से सुनील गावस्कर, मोहम्मद अजहरुद्दीन और कपिल देव जैसे नाम थे. तो वहीं इंग्लैंड के खेमे में ग्राहम गूच, माइक गैटिंग और एलन लैम्ब जैसे खिलाड़ी मौजूद थे.

ग्राहम गूच का शतक, भारत की हार

पहले बल्लेबाजी करते हुए इंग्लैंड ने छह विकेट पर 254 रन बनाए. ग्राहम गूच ने शानदार शतक जड़ा, जबकि कप्तान गैटिंग ने अहम अर्धशतक लगाया. भारत की ओर से मनिंदर सिंह ने तीन विकेट झटके. जवाब में भारतीय टीम 219 रन पर सिमट गई. अजहरुद्दीन ने संघर्षपूर्ण पारी खेली, लेकिन इंग्लैंड के गेंदबाजों ने दबाव बनाए रखा और मैच 35 रन से अपने नाम कर लिया.

इतिहास खुद को दोहराएगा या बदलेगा?

दिलचस्प बात यह है कि 1987 और 2026 दोनों मौकों पर भारत पिछला संस्करण जीतकर सेमीफाइनल में पहुंचा है. दोनों बार टीम को सेमीफाइनल से पहले सिर्फ एक हार मिली थी और मुकाबला वानखेड़े में ही खेला जा रहा है. 39 साल पहले इंग्लैंड विजयी रहा था, अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या भारत इस बार इतिहास की दिशा बदल पाएगा या नतीजा वही रहेगा. 

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