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'अगर युद्ध हुआ तो...', शांति वार्ता विफल होने पर पाकिस्तान को अफगानिस्तान की चेतावनी

इस्तांबुल में अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच शांति वार्ता का अंतिम दौर विफल हो गया. तालिबान ने कहा कि युद्ध की स्थिति में अपनी रक्षा का अधिकार है. पाकिस्तान ने युद्ध की धमकी दी. दोनों देश सीमा पर झड़पों के बाद आमने सामने हैं. दर्जनों लोग मारे गए. तुर्की और कतर ने मध्यस्थता की लेकिन सफलता नहीं मिली.

Calendar Last Updated : 09 November 2025, 07:46 AM IST
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इस्तांबुल शहर में अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच शांति वार्ता का अंतिम दौर शनिवार को खत्म हो गया. यह वार्ता दोनों देशों के बीच सीमा पर हो रही झड़पों को रोकने के लिए थी, लेकिन सफलता नहीं मिली. तालिबान सरकार ने कहा कि अगर युद्ध होता है तो वे अपनी रक्षा करेंगे. कई दौर की बातचीत पहले भी फेल हो चुकी है. इन झड़पों में सैनिक और आम लोग मारे गए हैं.

तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने कहा कि वार्ता फेल होने का दोष पाकिस्तान पर है. पाकिस्तान की मांगें गलत हैं. इससे शांति की राह में रुकावट आई. मुजाहिद ने बताया कि अफगानिस्तान क्षेत्र में अशांति नहीं चाहता. युद्ध उनकी पहली पसंद नहीं है. 

युद्ध अफगानिस्तान की पहली पसंद नहीं

मुजाहिद ने कहा कि अफगानिस्तान क्षेत्र में असुरक्षा नहीं चाहता है और युद्ध में उतरना हमारी पहली पसंद नहीं है. उन्होंने कहा कि अगर युद्ध छिड़ता है, तो हमें अपनी रक्षा करने का अधिकार है. इससे पहले एक बयान में उन्होंने लिखा कि अफगानिस्तान किसी को अपनी जमीन दूसरे देश के खिलाफ इस्तेमाल नहीं करने देगा. न ही कोई ऐसी हरकत बर्दाश्त करेगा जो उसकी संप्रभुता या सुरक्षा को नुकसान पहुंचाए.

वार्ता शुरू होने से पहले पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने अफगानिस्तान को चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि अगर बातचीत फेल हुई तो युद्ध होगा. जियो न्यूज को दिए इंटरव्यू में आसिफ से पूछा गया कि तालिबान से निपटने के लिए सैन्य टकराव आखिरी रास्ता है. जवाब में आसिफ ने कहा कि अगर बातचीत विफल होती है, तो सिर्फ़ युद्ध होगा. इस इंटरव्यू का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है.

सीमा पर लड़ाई शुरू

आसिफ ने कहा शनिवार को कि बातचीत खत्म हो गई है. उन्होंने चेताया कि युद्धविराम तभी चलेगा जब तक अफगानिस्तान की तरफ से कोई गलती न हो. पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने कहा कि उनका देश शांति चाहता है. लेकिन लोगों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएगा. तरार ने बताया कि पाकिस्तान तालिबान के किसी कदम का साथ नहीं देगा जो अफगान लोगों या पड़ोसियों के हित में न हो. पिछले महीने दो दौर की वार्ता फेल होने के बाद तुर्की ने बयान दिया.

इसमें कहा गया कि दोनों देश युद्धविराम पर राजी हुए हैं. सभी पक्ष निगरानी और जांच का तरीका बनाने पर सहमत हुए. यह शांति बनाए रखने और गलती करने वाले पर सजा लगाने के लिए था. अक्टूबर से दोनों देश आमने सामने हैं. अफगानिस्तान ने काबुल में दो विस्फोटों का दोष पाकिस्तान पर डाला. कुछ दिन बाद तालिबान ने कहा कि उन्होंने पाकिस्तानी चौकियों पर हमला किया, इसमें 58 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए. लेकिन पाकिस्तान ने सिर्फ 23 की मौत मानी. 

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