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नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है. इसी बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने बड़ा दावा किया है. बता दें, उनका कहना है कि अमेरिका के साथ हुए टकराव में ईरान की जीत हुई है और दुनिया भी इसे स्वीकार कर चुकी है. वहीं, गोलान हाइट्स को लेकर अमेरिकी राजदूत के एक बयान ने अलग बहस छेड़ दी है.
ईरानी सरकारी मीडिया IRNA के मुताबिक, पेजेश्कियन ने कहा कि अब अमेरिका के साथ चल रहे टकराव को खत्म किया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि दुनिया ईरान की जीत को मान रही है और अमेरिका को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विरोध का सामना करना पड़ रहा है. हालांकि, ईरान का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका उस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की तैयारी कर रहा है.
रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन ईरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने की रणनीति पर काम कर रहा है. अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर रोक लगाए. इसके अलावा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल और गैस टैंकरों की आवाजाही को सुरक्षित बनाए रखना भी अमेरिकी एजेंडे में शामिल है. इन मुद्दों को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ने की आशंका है. बता दें, तेहरान पहले भी अमेरिकी नीतियों का विरोध करता रहा है और अब राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने अपने देश की स्थिति को मजबूत बताया है.
इसी बीच तुर्किये में अमेरिकी राजदूत और सीरिया के विशेष दूत टॉम बैरक के बयान ने सबका ध्यान खींच लिया है. एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि गोलान हाइट्स पर इजरायल का कब्जा संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के खिलाफ है. गोलान हाइट्स पर 1967 के युद्ध के दौरान इजरायल ने सीरिया से नियंत्रण हासिल किया था. 1981 में इजरायल ने इसे अपने क्षेत्र का हिस्सा घोषित कर दिया था. हालांकि, संयुक्त राष्ट्र अब भी इसे सीरियाई क्षेत्र मानता है.
खास बात यह है कि 2019 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी नीति में बदलाव करते हुए गोलान हाइट्स पर इजरायल के नियंत्रण को मान्यता दी थी. ऐसे में अमेरिकी राजदूत का ताजा बयान पुराने अमेरिकी फैसले को लेकर नई चर्चा का कारण बन गया है.