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नई दिल्ली: कोलंबो के ऐतिहासिक सिन्हलीज स्पोर्ट्स क्लब (SSC) मैदान पर रविवार से भारत और श्रीलंका के बीच टेस्ट श्रृंखला का दूसरा मुकाबला खेला जाना है। गॉल में पहला टेस्ट 165 रनों के बड़े अंतर से जीतकर भारतीय टीम पहले ही सीरीज में 1-0 की बढ़त बना चुकी है। हालांकि, मुकाबले की पूर्व संध्या पर जब भारतीय हेड कोच गौतम गंभीर मीडिया के सामने आए, तो उनका रुख काफी आक्रामक और स्पष्ट नजर आया। गंभीर ने अपनी कोचिंग शैली, हालिया टेस्ट प्रदर्शन और बाहरी आलोचनाओं पर खुलकर बात की। गंभीर ने कहा कि वह भारतीय क्रिकेट को सफलता की राह पर ले जाने और देश के लिए ट्रॉफियां जीतने के मकसद से इस पद पर हैं।
'मेरा काम ट्रॉफियां जीतना है, लाइक्स बटोरना नहीं'
पिछले कुछ समय से भारतीय टीम के टेस्ट फॉर्म और गंभीर के फैसलों पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। इन आलोचनाओं का करारा जवाब देते हुए हेड कोच ने साफ कर दिया कि वह सोशल मीडिया की हवा और बाहरी राय से प्रभावित नहीं होते।
गंभीर ने कहा कि वह भारतीय क्रिकेट को सफलता की राह पर ले जाने और देश के लिए ट्रॉफियां जीतने के मकसद से इस पद पर हैं। उनका फोकस लाइक्स या व्यूज हासिल करना कभी नहीं रहा।
टेस्ट रैंकिंग और प्रदर्शन पर रुख
भारत की टेस्ट रैंकिंग और टीम के हालिया दौर को लेकर उठ रहे सवालों को गंभीर ने सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि रैंकिंग को जरूरत से ज्यादा तवज्जो देने की कोई आवश्यकता नहीं है। मीडिया और आलोचकों द्वारा टीम को संघर्षरत बताए जाने पर गंभीर ने सख्त ऐतराज जताया। हेड कोच का मानना है कि इंग्लैंड दौरे के बाद से भारत ने रेड बॉल क्रिकेट में संतुलित और बेहतर प्रदर्शन किया है।
टीम फिलहाल एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। रोहित शर्मा, विराट कोहली और रविचंद्रन अश्विन जैसे दिग्गज खिलाड़ियों की जगह नए खिलाड़ियों को स्थापित करना एक रात का काम नहीं है। इस प्रक्रिया में समय लगता है और नई पीढ़ी को ढलने के लिए थोड़ा वक्त देना अनिवार्य है।
टीम चयन और खिलाड़ियों का समर्थन
गंभीर ने दूसरे टेस्ट की प्लेइंग इलेवन को लेकर अपनी रणनीति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि मैदान पर वही बॉलिंग कॉम्बिनेशन उतरेगा जो विपक्षी टीम के 20 विकेट चटकाने की क्षमता रखता हो। कुलदीप यादव की मौजूदगी पर उन्होंने कहा कि वह एक बेहतरीन स्पिनर हैं, लेकिन अंतिम फैसला कोलंबो की परिस्थितियों और कप्तान की सोच के अनुसार लिया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने खिलाड़ियों को सुरक्षा देने की बात पर जोर दिया। गंभीर का मानना है कि सिर्फ 1-2 मैचों की विफलता के आधार पर किसी खिलाड़ी को आंकना गलत है। क्रिकेट में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, इसलिए युवाओं को लंबा रन-वे देना होगा ताकि वे खुद को साबित कर सकें।
3 मैचों की टेस्ट सीरीज की वकालत
इस दौरे पर भारत और श्रीलंका के बीच सिर्फ दो टेस्ट मैचों की सीरीज आयोजित की गई है। गंभीर ने इसे अपर्याप्त बताते हुए 3 टेस्ट मैचों की सीरीज को आदर्श बताया। उनका तर्क है कि 2 मैचों की सीरीज में अगर कोई टीम पहला मुकाबला गंवा देती है, तो उसके पास सीरीज में वापसी का मौका लगभग खत्म हो जाता है। ऐसी स्थिति में वह टीम सिर्फ सीरीज ड्रॉ कराने की होड़ में लग जाती है। 3 मैचों की सीरीज में पहला मैच हारने के बाद भी पलटवार करने और सीरीज का रुख बदलने की गुंजाइश बनी रहती है।