नई दिल्ली: बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचार का मुद्दा अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी गंभीर रूप से उठने लगा है. ब्रिटेन की संसद में कंजर्वेटिव पार्टी के वरिष्ठ सांसद और भारत समर्थक माने जाने वाले बॉब ब्लैकमैन ने इस विषय को प्रमुखता से उठाते हुए बांग्लादेश की मौजूदा स्थिति को विनाशकारी करार दिया है.
उन्होंने ब्रिटेन की लेबर सरकार से अपील की है कि वह मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार पर दबाव बनाए ताकि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और देश में निष्पक्ष, स्वतंत्र व समावेशी चुनाव कराए जा सकें.
ब्रिटिश संसद में बोलते हुए ब्लैकमैन ने कहा कि बांग्लादेश में हिंदू पुरुषों की सड़कों पर हत्याएं की जा रही हैं, उनके घरों और मंदिरों को जलाया जा रहा है. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह हिंसा केवल हिंदुओं तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय भी इसी तरह के हमलों का सामना कर रहे हैं. ब्लैकमैन ने सवाल उठाया कि जब देश में इस स्तर की असुरक्षा और अराजकता है, तो वहां लोकतंत्र की बहाली कैसे संभव हो पाएगी.
12 फरवरी को प्रस्तावित चुनावों की निष्पक्षता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाए. ब्लैकमैन के अनुसार तथाकथित स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों से पहले ही देश के प्रमुख राजनीतिक दल अवामी लीग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है, जबकि जनमत सर्वेक्षणों में इस पार्टी को करीब 30 प्रतिशत समर्थन प्राप्त है. उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि इस्लामी चरमपंथी समूह संविधान में स्थायी बदलाव के लिए जनमत संग्रह की मांग कर रहे हैं, जो बांग्लादेश की लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए बड़ा खतरा बन सकता है.
गौरतलब है कि बॉब ब्लैकमैन उन चार ब्रिटिश सांसदों में शामिल हैं जिन्होंने हाल ही में एक संयुक्त बयान जारी कर अवामी लीग समेत अन्य प्रमुख राजनीतिक दलों पर लगाए गए प्रतिबंधों पर गहरी चिंता जताई थी. इस बयान पर जिम शैनन, जस अटवाल और क्रिस लॉ ने भी हस्ताक्षर किए हैं.
इस बीच, भारत ने भी बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों को लेकर चिंता जाहिर की है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि चरमपंथियों द्वारा अल्पसंख्यकों, उनके घरों और व्यवसायों पर हमलों का एक परेशान करने वाला पैटर्न सामने आ रहा है, जिससे सख्ती और तत्परता से निपटना आवश्यक है.