'तबाही की ओर...', ईरान पर हुए हमले पर भड़का रूस; ग्लोबल लीडर्स ने क्या कहा?

रूस ने इन हमलों की कड़ी आलोचना की और इसे बेहद खतरनाक कदम बताया. रूस के सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष दिमित्री मेदवेदेव ने कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत केवल एक दिखावा थी.

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नई दिल्ली: ईरान पर अमेरिका और इजराइल की संयुक्त कार्रवाई के बाद पूरी दुनिया में चिंता बढ़ गई है. कई देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव को खतरनाक बताते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है.

अमेरिका और इजराइल ने शनिवार को ईरान के कई ठिकानों पर बड़े हमले किए. इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी जनता से अपनी किस्मत खुद तय करने और मौजूदा इस्लामी नेतृत्व के खिलाफ खड़े होने का आह्वान किया. जवाब में ईरान ने अलग-अलग देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य बेस को निशाना बनाया.

रूस ने हमलों की कड़ी आलोचना की

रूस ने इन हमलों की कड़ी आलोचना की और इसे बेहद खतरनाक कदम बताया. रूस के सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष दिमित्री मेदवेदेव ने कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत केवल एक दिखावा थी. रूस के विदेश मंत्रालय ने भी बयान जारी कर कहा कि वॉशिंगटन और तेल अवीव की कार्रवाई पूरे क्षेत्र को मानवीय और आर्थिक तबाही की ओर ले जा सकती है.

कतर ने भी ईरान की ओर से अपने क्षेत्र को निशाना बनाने की निंदा की और इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया. अधिकारियों के अनुसार, देश की वायु रक्षा प्रणाली ने एक ईरानी मिसाइल को हवा में ही मार गिराया और कई हमलों को विफल कर दिया.

यूरोपीय संघ ने क्या कहा?

यूरोपीय संघ ने क्षेत्रीय हालात को बेहद खतरनाक बताते हुए नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया. यूरोपीय आयोग की प्रमुख उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की और परमाणु सुरक्षा बनाए रखने को अहम बताया. वहीं, यूरोपीय संघ की शीर्ष कूटनीतिज्ञ काजा कैलास ने क्षेत्र से गैर-जरूरी कर्मचारियों को वापस बुलाने की घोषणा की.

यूक्रेन ने ईरानी नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराया

ब्रिटेन ने स्पष्ट किया कि उसने अमेरिका-इजराइल के संयुक्त हमलों में भाग नहीं लिया. सरकार ने कहा कि वह नहीं चाहती कि यह तनाव बड़े क्षेत्रीय युद्ध में बदले और उसकी प्राथमिकता मध्य पूर्व में रह रहे अपने नागरिकों की सुरक्षा है. यूक्रेन ने हमलों के लिए ईरानी नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराया. उसके अनुसार, ईरान की सरकार लंबे समय से अपने नागरिकों और अन्य देशों के खिलाफ हिंसक नीति अपनाती रही है, जिसके कारण यह टकराव बढ़ा.

अफ्रीकी संघ ने चेतावनी दी

फ्रांस ने भी कहा कि इस संकट के दौरान उसकी पहली चिंता क्षेत्र में मौजूद अपने नागरिकों और सैन्य बलों की सुरक्षा है. अफ्रीकी संघ ने चेतावनी दी कि संघर्ष बढ़ने से वैश्विक अस्थिरता और खासकर अफ्रीका की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ सकता है. संगठन ने तुरंत तनाव कम करने और संवाद का रास्ता अपनाने की अपील की. 

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